एग्रीवेट: अल नीनो ने कृषि क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया है. मौसम विज्ञान विभाग ने नवंबर तक अल नीनो स्थितियों और मजबूत होने की आशंका जताई है. ऐसे में रबी फसलों पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है. सहकारी उर्वरक संस्था कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) ने रबी सीजन में अल नीनो के असर से बुवाई क्षेत्रफल कम होने के साथ ही खाद की मांग भी घटने की आशंका जताई है. हालांकि, इस बीच कृभको ने खाद जरूरत पूरी करने के लिए गैर यूरिया उर्वरकों के आयात की तैयार कर ली है.
सहकारी उर्वरक संस्था कृषक भारती कोऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) आगामी रबी सीजन के लिए लगभग 4 लाख टन गैर-यूरिया उर्वरकों का आयात करने की योजना बना रही है. सहकारी संस्था की 46वीं वार्षिक आम बैठक के बाद आधिकारिक बयान में कहा गया है कि विपरीत मौसम परिस्थितियों के बावजूद खाद उपलब्धता बनाए रखने के लिए आयात की तैयारी की जा रही है. बता दें कि कृभको देशभर में किसानों को उर्वरकों की आपूर्ति करती है.
कृभको के चेयरमैन वी सुधाकर चौधरी ने बैठक के बाद पीटीआई के बताया कि रबी फसल सीजन के 3 से 4 लाख टन डीएपी और नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा पोटाश (एनपीके) उर्वरकों के आयात की व्यवस्था की गई है. उन्होंने कहा कि कृभको यूरिया के बाद देश में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों में शामिल डाय अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) जैसे फॉस्फेटिक उर्वरकों का आयात करती है.
कृभको के प्रबंध निदेशक एसएस यादव ने कहा कि संस्था हर साल करीब 12-15 लाख टन गैर-यूरिया उर्वरकों का आयात करती है, जबकि देश का कुल आयात करीब 70 लाख टन है. उन्होंने कहा कि हमने 8 लाख टन डीएपी और 1 लाख टन अन्य एनपीके उर्वरकों का आयात किया है. खरीफ फसल सीजन के लिए हमारे पास पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध थी. रबी फसल सीजन की मांग पूरी करने के लिए अगले 2-3 महीनों में 3 लाख टन और आयात किया जाएगा.
एसएस यादव ने कहा कि कृभको के पास पहले से 6 लाख टन उर्वरक का भंडार है और 3 लाख टन अतिरिक्त आयात से आगामी रबी फसल सीजन की मांग पूरी हो जाएगी. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक बाजार में गैर-यूरिया उर्वरकों की कीमतें अब भी ऊंची बनी हुई हैं, जो चिंता का विषय है. डीएपी की कीमत फिलहाल करीब 900 अमेरिकी डॉलर प्रति टन और एनपीके की कीमत करीब 915 अमेरिकी डॉलर प्रति टन है.
कृभको की 46वीं वार्षिक आम बैठक आज द अशोक होटल, नई दिल्ली में आयोजित की गई।
रबी सीजन अगले महीने शुरू होना है. लेकिन, संस्था ने अल नीनो के विपरीत असर से रबी फसलों की बुवाई कम होने पर उर्वरकों की मांग घटने की आशंका जताई है. रबी सीजन की उर्वरक मांग पर अल नीनो के संभावित असर के बारे में एस एस यादव ने कहा कि बुवाई कम होने की संभावना है. उन्होंने कहा कि कम बारिश के कारण खरीफ सीजन में फसल का रकबा कम रहा है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान उर्वरकों के कुल इस्तेमाल में कमी नहीं आई है.