झाबुआ : भिण्डी की खेती बनी आय बढ़ाने का माध्यम – एग्रीवेट

Team Agrivate
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झाबुआ : भिण्डी की खेती बनी आय बढ़ाने का माध्यम - एग्रीवेट - झाबुआ भिण्डी खेती

एग्रीवेट: 24 सितंबर 2026, झाबुआ: झाबुआ : भिण्डी की खेती बनी आय बढ़ाने का माध्यम – झाबुआ जिले के विकासखंड राणापुर के ग्राम डाबतलाई निवासी कृषक श्री प्रेम चेना सिंगाड़ हैं, जिन्होंने उद्यानिकी विभाग की MIDH (पार्ट-2 जायाद) योजना के अंतर्गत सब्जी क्षेत्र विस्तार घटक का लाभ लेकर भिण्डी की खेती की और अपनी शुद्ध आय में उल्लेखनीय वृद्धि की।

पहले मक्का की खेती से होती थी 27 हजार रुपये की शुद्ध आय – कृषक श्री प्रेम सिंगाड़ योजना का लाभ प्राप्त करने से पूर्व अपने 0.50 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में मुख्य रूप से मक्का की फसल लेते थे। मक्का की खेती में उन्हें लगभग 15 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था। फसल की तैयारी एवं उत्पादन में लगभग 9 हजार रुपये की लागत आती थी, जबकि उत्पादित मक्का से उन्हें लगभग 36 हजार रुपये की कुल आय प्राप्त होती थी। इस प्रकार खेती पर होने वाले व्यय को निकालने के बाद उनकी शुद्ध आय लगभग 27 हजार रुपये रहती थी।

खेती से परिवार की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए श्री सिंगाड़ अधिक आय देने वाली फसल अपनाना चाहते थे। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग की MIDH योजना के अंतर्गत सब्जी क्षेत्र विस्तार के संबंध में जानकारी प्राप्त हुई। विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने योजना का लाभ लेकर परंपरागत फसल के स्थान पर उद्यानिकी फसल के रूप में भिण्डी की खेती करने का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया ।

MIDH योजना से मिली 10 हजार रुपये की अनुदान सहायता – MIDH (पार्ट-2 जायाद) योजना के सब्जी क्षेत्र विस्तार घटक के अंतर्गत कृषक श्री सिंगाड़ को 0.50 हेक्टेयर क्षेत्र में भिण्डी उत्पादन के लिए 10 हजार रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई। योजना से प्राप्त सहयोग ने उन्हें सब्जी उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। श्री सिंगाड़ ने 0.50 हेक्टेयर क्षेत्र में भिण्डी की फसल लगाई। भिण्डी उत्पादन में उनकी कुल लागत लगभग 25 हजार रुपये रही। बेहतर उत्पादन के फलस्वरूप उन्हें करीब 20 क्विंटल भिण्डी प्राप्त हुई, जिससे लगभग 80 हजार रुपये की कुल आय अर्जित हुई। उत्पादन लागत निकालने के बाद कृषक को करीब 55 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई।

शुद्ध आय में हुई 28 हजार रुपये की वृद्धि – योजना का लाभ मिलने से पहले मक्का की खेती से श्री सिंगाड़ को लगभग 27 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त होती थी, जबकि भिण्डी की खेती से उनकी शुद्ध आय बढ़कर लगभग 55 हजार रुपये हो गई। इस प्रकार फसल में बदलाव और उद्यानिकी योजना का लाभ लेने से उनकी शुद्ध आय में करीब 28 हजार रुपये की वृद्धि हुई।

कृषक श्री प्रेम सिंगाड़ की यह सफलता दर्शाती है कि शासन की योजनाओं का लाभ लेकर फसल विविधीकरण एवं उद्यानिकी फसलों को अपनाना किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। योजना से मिली आर्थिक सहायता और सब्जी उत्पादन की ओर बढ़ाए गए कदम ने उनकी खेती को पहले की तुलना में अधिक लाभकारी बनाया है। श्री प्रेम सिंगाड़ की “कहानी बदलाव की” जिले के अन्य कृषकों के लिए भी प्रेरणादायी है।

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