एग्रीवेट: कर्नाटक शुगरकेन ग्रोअर्स एसोसिएशन ने गन्ने का फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (FRP) बढ़ाने की मांग को लेकर केंद्र सरकार को 10 अक्टूबर 2026 तक का समय दिया है. एसोसिएशन ने कहा है कि अगर तय समय तक FRP नहीं बढ़ाया गया तो राज्यभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा. एसोसिएशन के अध्यक्ष कुरुबुर शांतकुमार ने कहा है कि एसोसिएशन के पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने 3 सितंबर को नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य, सार्वजनिक वितरण और उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की थी. प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को ज्ञापन सौंपकर गन्ने का FRP बढ़ाने की मांग की थी.
एसोसिएशन के मुताबिक, फिलहाल 10.25 फीसदी रिकवरी वाले गन्ने का FRP 4,500 रुपये प्रति टन है. जबकि, 11.25 फीसदी रिकवरी पर 4,850 रुपये, 12.25 फीसदी पर 5,200 रुपये और 13.25 फीसदी रिकवरी पर 5,550 रुपये प्रति टन FRP है. वहीं, 2025-26 सीजन के लिए केंद्र सरकार ने 10.25 फीसदी की बेसिक रिकवरी पर FRP 3,550 रुपये प्रति टन तय किया था.
एसोसिएशन के अध्यक्ष कुरुबुर शांतकुमार ने कहा कि अगर 10 अक्टूबर तक FRP नहीं बढ़ाया गया, तो केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ राज्यभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने गन्ने की कटाई और ढुलाई का खर्च 800 रुपये प्रति टन तय किया है. शांतकुमार ने किसानों से अपील की कि अगर चीनी मिलें तय रकम से ज्यादा कटौती करती हैं, तो वे अपने जिले के डिप्टी कमिश्नर के पास शिकायत दर्ज कराएं.
हाल ही में हुई शुगरकेन कंट्रोल बोर्ड की बैठक में गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से 800 रुपये प्रति टन अतिरिक्त स्टेट एडवाइज्ड प्राइस (SAP) तय करने की मांग की. किसानों ने कहा कि तमिलनाडु में भी इसी तरह अतिरिक्त राशि दी जा रही है. प्रतिनिधियों ने यह मांग गन्ना मंत्री रुद्रप्पा लमानी और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रिजवान अरशद के सामने रखी.
एसोसिएशन ने सूखा प्रभावित इलाकों के किसानों के पुराने कर्ज को नए सिरे से तय करने और नए कर्ज देने की भी मांग की. एसोसिएशन के राज्य संयोजक बरदनापुरा नागराज ने कहा कि मौजूदा NABARD योजना का किसानों को पर्याप्त फायदा नहीं मिल रहा है. उन्होंने सूखा प्रभावित किसानों के फसल कर्ज माफ करने की मांग की. कुरुबुर शांतकुमार ने कहा कि राज्य के 177 तालुकों में सूखा घोषित किया गया है. इसके बावजूद कई इलाकों में फसल नुकसान का सर्वे अभी तक नहीं हुआ है. उन्होंने सरकार पर सर्वे में देरी करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि और किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा जल्द जारी करने की मांग की.
शांतकुमार ने राज्य में बिजली की कमी का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से किसानों की फसल सूख रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसान फसल बचाने के लिए बिजली की कमी से जूझ रहे हैं, तब बड़े स्तर पर दशहरा समारोह आयोजित करने की जरूरत क्या है. उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि समारोहों के लिए बिजली की आपूर्ति की जा रही है, जबकि किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है.