हरियाणा में पराली जलाने पर सख्ती, ड्रोन से होगी निगरानी.. बनेगी पराली प्रोटेक्शन फोर्स – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: धान की कटाई का सीजन शुरू होने से पहले हरियाणा सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए नई रणनीति तैयार की है. पहली बार पराली जलाने की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है. इसके अलावा जिलों और ब्लॉक स्तर पर एक अलग ‘पराली प्रोटेक्शन फोर्स’ तैनात की जाएगी. सरकार ने रात के समय गश्त बढ़ाने का भी फैसला किया है, ताकि देर रात खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जा सके. इसके साथ ही पराली का उचित प्रबंधन करने वाले किसानों को आर्थिक प्रोत्साहन भी दिया जाएगा.

यह पहल हरियाणा के उस एक्शन प्लान का हिस्सा है, जिसका मकसद खेतों में आग की घटनाओं को कम करना और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों का पालन करना है. हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने द ट्रिब्यून से कहा कि इन कदमों का उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह खत्म करना और पूरे क्षेत्र की हवा को साफ रखना है.

हरियाणा सरकार पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करेगी. CAQM के निर्देशों के तहत राज्य सरकार DRIISHYA के साथ मिलकर रियल टाइम निगरानी की व्यवस्था कर रही है. डिप्टी कमिश्नरों को पहले से ऐसे गांवों और जगहों की पहचान करने को कहा गया है, जहां ड्रोन उड़ाकर निगरानी की जाएगी. पराली जलाने की निगरानी के लिए ड्रोन, सैटेलाइट तस्वीरों और जमीन पर जांच को एक साथ इस्तेमाल किया जाएगा. इससे खेतों में आग की घटनाओं की पहचान और जांच ज्यादा सटीक तरीके से हो सकेगी.

सरकार ने जिलों और ब्लॉक स्तर पर ‘पराली प्रोटेक्शन फोर्स’ बनाने का फैसला किया है. इसमें पुलिसकर्मी, कृषि विभाग के अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, नोडल और क्लस्टर अधिकारी समेत दूसरे संबंधित विभागों के कर्मचारी शामिल होंगे. यह टीम खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखेगी और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करेगी.

सरकार ने पराली जलाने के मामलों में कार्रवाई का ढांचा भी तय किया है. पराली जलाने का मामला सत्यापित होने पर प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज होगी, चालान काटा जाएगा और किसान के जमीन रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ की जाएगी. इसके अलावा दोषी किसान से पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क भी वसूला जाएगा. वहीं, सरकार पराली जलाने से रोकने के साथ किसानों को फसल अवशेष के बेहतर प्रबंधन के विकल्प भी दे रही है. इसके तहत फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों का सही इस्तेमाल करने वाले किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी. इसके अलावा इन मशीनों की खरीद पर सब्सिडी भी दी जाएगी.

सितंबर में यमुनानगर, अंबाला, करनाल और कुरुक्षेत्र में धान की कटाई शुरू होती है. इसके बाद अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और जींद में कटाई का काम तेज होगा. अधिकारियों को पड़ोसी राज्यों और आसपास के जिलों में मशीन मालिकों के साथ भी तालमेल करने को कहा गया है. इससे पूरे सीजन में जरूरत के मुताबिक मशीनों को एक जिले से दूसरे जिले में आसानी से पहुंचाया जा सकेगा.

हरियाणा सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए 8,134 गांव स्तर के नोडल अधिकारी तैनात किए हैं. कृषि विभाग के निदेशक अमित खत्री ने बताया कि राज्य में करीब 6.21 लाख पंजीकृत धान किसान हैं. ये किसान करीब 5,600 गांवों में लगभग 34.1 लाख एकड़ में धान की खेती कर रहे हैं. अब तक 6.04 लाख किसानों को नोडल अधिकारियों की निगरानी में लाया जा चुका है.

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