एग्रीवेट: India Sugar Export USA 2026: अमेरिकी बाजार में चीनी निर्यात करने वाले भारतीय कारोबारियों के लिए राहत की खबर है. अमेरिका ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत को कच्ची गन्ना चीनी के निर्यात का अतिरिक्त कोटा दिया है. भारत को 542 मीट्रिक टन रॉ वैल्यू (MTRV) का अतिरिक्त कोटा मिला है. इसके बाद अमेरिका में कम शुल्क पर चीनी भेजने के लिए भारत की कुल सीमा बढ़कर 9,148 MTRV हो गई है. इससे भारतीय चीनी निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में पहले के मुकाबले थोड़ी ज्यादा मात्रा भेजने का मौका मिलेगा. हालांकि, इसके लिए तय नियमों और जरूरी दस्तावेजों को पूरा करना होगा.
अमेरिका ने जुलाई 2026 में भारत को कच्ची गन्ना चीनी के लिए शुरुआती तौर पर 8,606 मीट्रिक टन रॉ वैल्यू का कोटा दिया था. अब इसमें 542 मीट्रिक टन रॉ वैल्यू की और बढ़ोतरी की गई है. इस तरह वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत का कुल कोटा 9,148 मीट्रिक टन रॉ वैल्यू हो गया है. यह कोटा अमेरिका की टैरिफ-रेट कोटा यानी TRQ व्यवस्था के तहत दिया गया है. आसान भाषा में समझें तो इस व्यवस्था में तय मात्रा तक चीनी को कम शुल्क पर अमेरिका भेजा जा सकता है. लेकिन तय सीमा से ज्यादा चीनी भेजने पर ज्यादा शुल्क देना पड़ता है.
अमेरिकी कृषि विभाग की विदेशी कृषि सेवा के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल 11,17,195 मीट्रिक टन कच्ची चीनी के आयात का कोटा तय किया है. यह कोटा विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के साथ किए गए वादे को पूरा करने के लिए रखा गया है. अमेरिका ने 24 जुलाई 2026 को अलग-अलग देशों के लिए 10,61,202 मीट्रिक टन कच्ची चीनी का शुरुआती कोटा तय किया था. अब बची हुई 55,993 मीट्रिक टन चीनी का कोटा भी अलग-अलग देशों को दे दिया गया है. इसी में भारत को 542 मीट्रिक टन अतिरिक्त कोटा मिला है.
अमेरिका का वित्त वर्ष 2026-27, 1 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 30 सितंबर 2027 तक चलेगा. इस दौरान तय शर्तों को पूरा करने वाले भारतीय निर्यातक कम शुल्क वाले कोटे के तहत अमेरिका में चीनी भेज सकेंगे. इसके लिए निर्यातकों को यह साबित करना होगा कि चीनी भारत में बनी है और वह तय कोटे के लिए योग्य है. इसके अलावा मूल देश और कोटा पात्रता से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी देने होंगे.
भारत जैसे देशों को अमेरिका में चीनी भेजने के लिए यह साबित करने वाले सही कागज देने होते हैं कि चीनी किस देश की है और उसे कोटा के तहत भेजने की मंजूरी मिली है. यानी सिर्फ कोटा मिलना ही काफी नहीं है, निर्यातकों को जरूरी कागजात भी पूरे करने होंगे. भारत से चीनी निर्यात की नीति घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता और सरकार के नियमों पर निर्भर करती है. अमेरिका की ओर से दिया जाने वाला टीआरक्यू कोटा भारत की घरेलू चीनी निर्यात नीति से अलग है. चीनी निर्यात से जुड़े काम में विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) जैसी संस्थाएं अहम भूमिका निभाती हैं.
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत से अमेरिका को चीनी और कन्फेक्शनरी उत्पादों का निर्यात करीब 30.54 मिलियन डॉलर का रहा है. ऐसे में अतिरिक्त कोटा मिलने से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में थोड़ी और जगह मिल सकती है. हालांकि, इसका वास्तविक फायदा कितना होगा, यह घरेलू चीनी उपलब्धता, सरकार की निर्यात नीति और निर्यातकों की कोटा शर्तें पूरी करने की क्षमता पर निर्भर करेगा.