एग्रीवेट: KRISHAK JAGAT | National Agriculture Hindi Newspaper
24 सितंबर 2026, नई दिल्ली: रोजगार की तलाश में थे देवबगस, बायोफ्लॉक तकनीक ने बदली राह; अब सालाना ₹10 लाख का मछली उत्पादन – मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा विकासखंड के ग्राम गिंदौरमना निवासी देवबगस दांगी रोजगार की तलाश में थे, लेकिन उन्हें स्थायी रोजगार का अवसर नहीं मिल पा रहा था। इसी दौरान उनकी मुलाकात जिला मत्स्य अधिकारी से हुई, जहां उन्हें केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की जानकारी मिली। कम जलक्षेत्र में अधिक मत्स्य उत्पादन की पौंड बायोफ्लॉक तकनीक उन्हें उपयोगी लगी और उन्होंने इसी तकनीक को अपनाकर मत्स्य पालन शुरू करने का फैसला किया।
योजना से प्रेरित होकर देवबगस दांगी ने ग्राम गिंदौरमीना में पौंड बायोफ्लॉक की दो यूनिट स्थापित कीं। दोनों यूनिट की कुल क्षमता 21 हजार फिंगरलिंग है और इनकी स्थापना पर करीब 28 लाख रुपये की लागत आई। योजना के तहत उन्हें 11.20 लाख रुपये का अनुदान भी प्राप्त हुआ। दोनों यूनिट में 10,500 फिंगरलिंग का संचयन कर इंटेंसिव फिश फार्मिंग पद्धति अपनाई गई। बायोफ्लॉक तकनीक में प्रोबायोटिक का उपयोग किया जाता है, जिससे मत्स्य पालन से निकलने वाले अवशिष्ट पदार्थ उपयोगी खाद्य में परिवर्तित होते हैं। इससे फीडिंग लागत कम करने के साथ कम जलक्षेत्र में अधिक मछली उत्पादन करना संभव होता है।
इस तकनीक को अपनाने के बाद देवबगस दांगी को मत्स्य पालन में बेहतर उत्पादन मिलने लगा है। वर्तमान में वे हर साल करीब 10 लाख रुपये की मछली का उत्पादन कर रहे हैं। इस तरह पौंड बायोफ्लॉक तकनीक उनके लिए मत्स्य पालन को रोजगार और आय का प्रभावी माध्यम बनाने में मददगार साबित हुई है।
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
The post रोजगार की तलाश में थे देवबगस, बायोफ्लॉक तकनीक ने बदली राह; अब सालाना ₹10 लाख का मछली उत्पादन appeared first on Krishak Jagat (कृषक जगत).