एग्रीवेट: 24 सितंबर 2026, नई दिल्ली: किसानों के लिए बेहतर होंगी वाटरशेड विकास योजनाएं, राष्ट्रीय तकनीकी समिति की बैठक में हुआ मंथन – किसानों के लिए वाटरशेड विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने और उनके बेहतर क्रियान्वयन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर मंथन किया गया। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण (एनआरएए) ने REWARD कार्यक्रम के तहत 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के एनएएससी परिसर में राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी समिति (एनएलटीसी) की बैठक आयोजित की। बैठक में वाटरशेड विकास से जुड़े तकनीकी दिशानिर्देशों, डेटा और योजना निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. चंद्र शेखर कुमार, आईएएस ने की। इसमें आईसीएआर के डीडीजी (एनआरएम) डॉ. ए.के. नायक, डीओएलआर के संयुक्त सचिव (डब्ल्यूएम) नितिन खाडे, ओडिशा के निदेशक (डीएससी एवं डब्ल्यूडी) डॉ. सुब्रत पांडा और कर्नाटक के डब्ल्यूडीडी आयुक्त श्री उपेंद्र प्रताप सिंह सहित करीब 45 तकनीकी विशेषज्ञ और प्रतिनिधि शामिल हुए।
डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने REWARD कार्यक्रम के तहत एकत्र किए गए आंकड़ों के आधार पर राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश (एनटीजी) के मसौदे में किए गए दावों और कथनों के सत्यापन पर जोर दिया। उन्होंने ओडिशा और कर्नाटक की राज्य सरकारों को वाटरशेड डेटा और निर्णय समर्थन प्रणाली (डीएसएस) को सभी संबंधित हितधारकों के साथ साझा करने की सलाह दी।
आईसीएआर के डीडीजी (एनआरएम) डॉ. ए.के. नायक ने वाटरशेड की बेहतर योजना के लिए भूमि संसाधन सूची (एलआरआई) और जल विज्ञान के एकीकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभिन्न निष्कर्षों तक पहुंचने के लिए अपनाई गई कार्यप्रणालियों को राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही, वेब पोर्टल जल्द विकसित करने की आवश्यकता बताई।
डीओएलआर के संयुक्त सचिव (डब्ल्यूएम) श्री नितिन खाडे ने कार्यों के क्रियान्वयन के लिए अधिक समय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की अवधि छह महीने से घटाकर तीन महीने करने का सुझाव दिया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के बीच अभिसरण से जुड़े पहलुओं को भी राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों में शामिल करने की बात कही।
बैठक की शुरुआत में REWARD की तकनीकी विशेषज्ञ और प्रधान अन्वेषक डॉ. सुसमा सुधिश्री ने पिछली एनएलटीसी बैठक की कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसके साथ ही राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों के दूसरे मसौदे में किए गए संशोधनों की जानकारी भी दी गई। डॉ. सुसमा सुधिश्री ने ओडिशा और कर्नाटक की राज्य स्तरीय नोडल एजेंसियों से रिकॉर्ड किए गए डेटा को एनआरएए और कंसोर्टियम भागीदारों के साथ साझा करने का अनुरोध किया, ताकि उसका विश्लेषण, रिपोर्ट तैयार करने और राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों के सत्यापन में उपयोग किया जा सके। राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों का यह मसौदा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 के वाटरशेड विकास घटक के तहत देश में भविष्य की वाटरशेड विकास योजनाओं के लिए उपयोग किया जाएगा।