एग्रीवेट: 23 सितंबर 2026, जबलपुर: पारंपरिक विधि की तुलना में एसआरआई पद्धति से धान की रोपाई से मिले दोगुने कल्ले – किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की आत्मा परियोजना के अंतर्गत जिले के विकासखंड पनागर के ग्राम कुशनेर में कृषक कुलदीप पटेल के खेत में एसआरआई विधि और पारंपरिक विधि से धान की रोपाई के प्रदर्शन का अवलोकन आज मंगलवार को परियोजना संचालक आत्मा डॉ इंदिरा त्रिपाठी ने परियोजना की सहायक तकनीकी प्रबंधक दीपमाला महोबे के साथ किया।
कृषक कुलदीप पटेल के खेत में एसआरआई और पारंपरिक विधि से धान की रोपाई का यह प्रदर्शन उन्नत एवं कम लागत वाली कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया, ताकि क्षेत्र के किसान दोनों विधियों से फसल में आये अंतर को जान सकें।
अवलोकन के दौरान देखा गया कि पारंपरिक विधि से लगाए गए धान के पौधों में औसतन 10 से 12 कल्ले (कंसे) ही आए हैं। वहीं, एसआरआई विधि से रोपे गए पौधों में 17-19 कल्ले प्राप्त हुए, जो पारंपरिक विधि की तुलना में कहीं ज्यादा हैं।
इस अवसर पर कृषक कुलदीप पटेल ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे पहले केवल सामान्य तरीके से ही धान की रोपाई करते थे। इस बार आत्मा योजना की सहायक तकनीकी प्रबंधक दीपमाला महोबे के मार्गदर्शन में एक प्लॉट में एसआरआई विधि से और दूसरे में पारंपरिक विधि से रोपाई की।उन्होंने बताया कि दोनों तकनीकों की तुलना करने पर स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। एसआईआर विधि से रोपाई करने पर उन्हें उत्पादन दोगुना होने की पूरी उम्मीद है।
प्रदर्शन के अवलोकन के दौरान कृषि अधिकारियों ने किसानों को एसआरआई विधि के तहत कम बीज दर, पौधों के बीच उचित दूरी , जल प्रबंधन और पौधों की वैज्ञानिक देखभाल संबंधी प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी।परियोजना संचालक आत्मा डॉ इंदिरा त्रिपाठी ने सभी विकासखण्डों के बीटीएम एवं एटीएम को निर्देशित किया कि अन्य किसानों को इस विधि के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने बताया कि फसल की कटाई के बाद अंतिम उपज, कुल लागत और अन्य मानकों के आधार पर दोनों विधियों का विस्तृत तुलनात्मक आंकलन किया जाएगा, ताकि अन्य किसानों को भी इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।