मखाना-पाम की खेती और 125 दिन रोजगार पर कैबिनेट की मुहर, किसानों और गांवों पर फोकस, इस बड़े खुलासे से मचा हड़कंप – एग्रीवेट

atulpradhan
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एग्रीवेट: Bihar Cabinet Decisions: बिहार कैबिनेट ने मंगलवार को हुई बैठक में किसानों, ग्रामीण रोजगार, बाढ़ प्रबंधन, खेती और धार्मिक पर्यटन से जुड़े कई अहम फैसलों को मंजूरी दी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुल 17 प्रस्तावों पर फैसला लिया गया. इनमें मखाना की खेती को बढ़ावा देने से लेकर बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए 1,000 करोड़ रुपये, ऑयल पाम की खेती और ग्रामीण परिवारों को 125 दिन तक रोजगार देने से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं. बिहार में मखाना किसानों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 89.80 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है. इस योजना के तहत मखाना उत्पादन बढ़ाने के साथ बेहतर बीज, किसानों की ट्रेनिंग और प्रोसेसिंग सुविधाओं पर काम किया जाएगा. इसके अलावा मखाने की ब्रांडिंग, मार्केटिंग, निर्यात और सर्टिफिकेशन को भी मजबूत करने की योजना है. इसका मकसद मखाना उत्पादन से जुड़े किसानों, कारोबारियों और किसान उत्पादक संगठनों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है. बिहार में बाढ़ हर साल बड़ी चुनौती रहती है. इसे देखते हुए कैबिनेट ने जल संसाधन विभाग को आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) से 1,000 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि देने को मंजूरी दी है. इस पैसे का इस्तेमाल बाढ़ से बचाव, प्रभावित इलाकों में जरूरी काम, सिंचाई परियोजनाओं और जल-जीवन-हरियाली से जुड़े कार्यों में किया जा सकेगा. रिपोर्ट के मुताबिक इस साल करीब 15 जिलों के 88 प्रखंडों और 2,642 गांवों में बाढ़ का असर पड़ा है. किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा दूसरी खेती से जोड़ने के लिए ऑयल पाम पर भी जोर दिया गया है. नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम के तहत बिहार में इस खेती को बढ़ावा देने के लिए 2.10 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी मिली है. इसका मकसद राज्य में तिलहन और खाद्य तेल के उत्पादन को बढ़ाना है. किसानों के लिए फसल के नए विकल्प तैयार होने से खेती में विविधता लाने में मदद मिल सकती है. ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार से जुड़ा फैसला भी कैबिनेट के एजेंडे में रहा. राज्य के सभी 38 जिलों में ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ को 1 जुलाई 2026 से लागू करने की मंजूरी दी गई है. इस योजना में काम मांगने वाले ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों तक अकुशल मजदूरी वाला रोजगार देने का प्रावधान है. इससे गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों की आय को सहारा देने की कोशिश की जाएगी.

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