एग्रीवेट: देश में इस साल बासमती चावल का उत्पादन घट सकता है. बासमती की खेती का रकबा करीब 4 फीसदी कम हुआ है. इसका सबसे ज्यादा असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में देखने को मिला है. रकबा घटने से इस साल बासमती के दाम को सहारा मिल सकता है. वहीं, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय बासमती के निर्यातकों को विदेशी खरीदारों से बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है. पश्चिम एशिया भारतीय बासमती चावल का प्रमुख बाजार है. उद्योग जगत के मुताबिक, 2025 में बासमती की खेती करीब 24.9 लाख हेक्टेयर में हुई थी. इस साल रकबा लगभग 1 लाख हेक्टेयर कम होकर करीब 23.9 लाख हेक्टेयर रह गया है. पिछले साल देश में बासमती चावल का उत्पादन करीब 1 करोड़ टन रहा था. ऐसे बासमती की खेती के मामले में पंजाब से अच्छी खबर है. राज्य में इस साल बासमती का रकबा पिछले साल के करीब 5 लाख हेक्टेयर के स्तर पर बना हुआ है. हालांकि, पिछले साल भारी बारिश और बाढ़ से पंजाब में बासमती की फसल को नुकसान हुआ था. ऐसे में इस साल राज्य में उत्पादन पिछले साल के मुकाबले ज्यादा रह सकता है. बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, बासमती की खेती का रकबा लगातार दूसरे साल घटने का अनुमान है. 2024 में देश में करीब 27.5 लाख हेक्टेयर में बासमती की खेती हुई थी. इसके मुकाबले 2025 में रकबा घटकर 24.9 लाख हेक्टेयर रह गया था. अब 2026 में इसमें करीब 1 लाख हेक्टेयर की और कमी आने का अनुमान है. इससे इस साल बासमती की कीमतों पर असर पड़ सकता है और निर्यातकों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बन सकती है. बासमती चावल की खेती सिर्फ जीआई (Geographical Indication) वाले राज्यों में ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश जैसे गैर-जीआई राज्यों में भी होती है. इस साल मध्य प्रदेश में कम बारिश के कारण बासमती की खेती का रकबा घटा है. राज्य में बासमती और गैर-बासमती समेत कुल धान का रकबा 4 सितंबर तक पिछले साल के मुकाबले 1.75 लाख हेक्टेयर कम रहा. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 के खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश में धान की खेती 42.10 लाख हेक्टेयर में हुई थी. उद्योग के अनुमान के अनुसार, राज्य में बासमती का रकबा करीब 6-7 लाख हेक्टेयर है. इस साल धान के रकबे में जो कमी आई है, उसका पूरा असर बासमती की खेती में माना जा रहा है. भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 65.2 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया था. इससे देश को करीब 5.67 अरब डॉलर की कमाई हुई. इस दौरान बासमती की औसत कीमत करीब 870 डॉलर प्रति टन रही. चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून अवधि में भारत ने 15.4 लाख टन बासमती चावल का निर्यात किया है. इससे करीब 1.44 अरब डॉलर की कमाई हुई. इस दौरान औसत कीमत बढ़कर करीब 938 डॉलर प्रति टन रही. ये आंकड़े एपीडा (APEDA) के हैं. हरियाणा के करनाल में किसान अब बासमती की पूसा 1509 किस्म मंडियों में लेकर पहुंचने लगे हैं. यह किस्म कम अवधि में तैयार हो जाती है, इसलिए बासमती की अन्य किस्मों के मुकाबले इसकी आवक पहले शुरू होती है. फिलहाल करनाल में पूसा 1509 का भाव करीब 3,950 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है. व्यापारियों के मुताबिक, करनाल के साथ उत्तर प्रदेश के पड़ोसी शामली जिले से आने वाली बासमती की भी अच्छी मांग है. बाजार में प्रीमियम किस्म पूसा 1121 का रकबा कम रहने की उम्मीद है. ऐसे में कारोबारियों को आगे बासमती के दाम में और तेजी आने की संभावना दिख रही है.