एथनॉल टेंडर में चावल पर 30% की सीमा, मक्का की खरीद कीमत घटाई, इस बड़े खुलासे से मचा हड़कंप – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 05 नवंबर 2026, नई दिल्ली: एथनॉल टेंडर में चावल पर 30% की सीमा, मक्का की खरीद कीमत घटाई –  तेल कंपनियों ने 2026-27 एथनॉल सप्लाई वर्ष के लिए टेंडर की शर्तों में बड़ा बदलाव किया है। 3 नवंबर को जारी संशोधित टेंडर दस्तावेज़ (कॉरिजेंडम) के मुताबिक अब सरकारी भंडार के चावल से बनने वाले एथनॉल की मात्रा पर सीमा तय कर दी गई है, जबकि मक्का से बनने वाले एथनॉल की खरीद कीमत घटा दी गई है। इससे चावल, मक्का और गन्ने की फसल से जुड़े किसानों पर अलग-अलग तरह का असर पड़ने की संभावना है।

पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का राष्ट्रीय कार्यक्रम (एथनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम) पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ा है। एथनॉल बनाने के लिए गन्ना, चावल, मक्का और खराब अनाज जैसे अलग-अलग कच्चे माल (फीडस्टॉक) इस्तेमाल होते हैं, और तेल कंपनियां हर साल टेंडर के ज़रिए डिस्टिलरियों से एथनॉल खरीदती हैं।

कॉरिजेंडम में साफ लिखा है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) से खरीदे गए 72 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त चावल से बनने वाला 324 करोड़ लीटर एथनॉल 30 जून 2027 तक एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम के लिए आवंटित किया गया है। यह मात्रा पहली तीन तिमाहियों में बराबर-बराबर बांटी गई है, यानी हर तिमाही अधिकतम 108 करोड़ लीटर।

नई शर्त के मुताबिक कोई भी एक डिस्टिलरी किसी तिमाही में अपने कुल एथनॉल ऑफर का 30 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा FCI के चावल से नहीं बना सकेगी। अगर कोई डिस्टिलरी इस सीमा से ज़्यादा चावल-एथनॉल का ऑफर देती है, तो सभी बोली लगाने वालों की पात्र मात्रा आनुपातिक रूप से घटा दी जाएगी।

खराब या क्षतिग्रस्त अनाज (डैमेज्ड फूडग्रेन) से बनने वाले एथनॉल पर भी सालाना 160 करोड़ लीटर की सीमा रखी गई है, जो कुल टेंडर मात्रा का करीब 14.5 प्रतिशत है और हर तिमाही 40 करोड़ लीटर बंटेगी। इस तरह चावल और खराब अनाज को मिलाकर अधिकतम 484 करोड़ लीटर एथनॉल ही इन दो स्रोतों से आ सकेगा।

गन्ने से जुड़े फीडस्टॉक पर भी असर पड़ा है। 16 अक्टूबर के टेंडर में तेल कंपनियों ने गन्ने के रस, शीरे (सिरप), चीनी या बी-हैवी मोलासेस से बनने वाले एथनॉल के लिए कोई ऑफर नहीं मांगा, हालांकि सी-हैवी मोलासेस से एथनॉल बनाने की अनुमति अब भी जारी है। पिछले महीने ही ज़्यादातर गन्ना-आधारित खरीद रोकने का फैसला लिया गया था, ताकि घरेलू बाज़ार में चीनी की कीमतें और उपलब्धता प्रभावित न हो।

मक्का से बनने वाले एथनॉल की खरीद कीमत ₹71.86 प्रति लीटर से घटाकर ₹68.86 प्रति लीटर कर दी गई है, यानी तीन रुपये प्रति लीटर की सीधी कटौती। मंडियों में मक्का का भाव फिलहाल करीब ₹29-30 प्रति किलो के आसपास है, जो 2026-27 के लिए तय किए गए ₹24 प्रति किलो (₹2,400 प्रति क्विंटल) के समर्थन मूल्य से ऊपर है।

2026-27 के लिए तेल कंपनियों ने कुल 1,100 करोड़ लीटर एथनॉल के लिए टेंडर जारी किया है। चावल और खराब अनाज मिलकर अधिकतम 484 करोड़ लीटर यानी लगभग 44 प्रतिशत मात्रा ही पूरी हो पाएगी, बाकी हिस्सा मक्का और दूसरे फीडस्टॉक से जुटाना होगा। कीमत में कटौती के बाद मक्का की सप्लाई इतनी बड़ी मांग पूरी कर पाएगी या नहीं, इस पर किसान संगठनों और डिस्टिलरी उद्योग दोनों की निगाहें टिकी हैं।

तेल कंपनियों की बोली प्रक्रिया अब 2026-27 एथनॉल सप्लाई वर्ष के लिए इन्हीं नई शर्तों के आधार पर आगे बढ़ेगी, और आने वाले हफ्तों में डिस्टिलरियों से मिलने वाले ऑफर से साफ होगा कि मक्का और अन्य फीडस्टॉक बाकी मांग को कितना पूरा कर पाते हैं।

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