धान बेचने के बाद भी किसानों को नहीं मिला पैसा, 10 दिन से कर रहे इंतजार.. फीकी रह सकती है दिवाली – एग्रीवेट

Team Agrivate
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धान बेचने के बाद भी किसानों को नहीं मिला पैसा, 10 दिन से कर रहे इंतजार.. फीकी रह सकती है दिवाली - एग्रीवेट - धान बेचने बाद

एग्रीवेट: सरकार का दावा है कि मंडियों में धान की खरीद के 72 घंटे के भीतर किसानों के बैंक खातों में भुगतान कर दिया जाता है. लेकिन हरियाणा के करनाल जिले में कई किसान 10 दिन से ज्यादा समय बीतने के बाद भी अपनी फसल का पैसा मिलने का इंतजार कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि मंडियों से खरीदे गए धान का उठान धीमी गति से होने के कारण भुगतान में देरी हो रही है. ऐसे में किसानों के पास पैसों की किल्लत हो गई है. किसानों का कहना है कि अगर समय पर भुगतान नहीं हुआ, तो उनकी दिवाली फीकी रह जाएगी. वे अपने बच्चों के लिए पटाखे और नए कपड़े तक नहीं खरीद पाएंगे.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार शाम तक करनाल जिले की मंडियों में 85,200 किसानों से कुल 6.65 लाख मीट्रिक टन धान पहुंचा है. इसमें से 5.38 लाख मीट्रिक टन धान की सरकारी खरीद हुई है, जबकि केवल 4.27 लाख मीट्रिक टन धान का ही उठान हो पाया है. धान का उठान धीमा होने से मंडियों में खरीद और भुगतान की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, किसानों को कुल 1,324 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है. आई-फॉर्म जारी होने के बाद करीब 979.72 करोड़ रुपये के बिल मंजूर किए गए हैं. इसमें से किसानों के खातों में लगभग 958.34 करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं, जबकि 21.38 करोड़ रुपये का भुगतान अभी बाकी है. इंद्री ब्लॉक के किसान वरिंदर सिंह ने द ट्रिब्यून को कहा कि उन्होंने 9 अक्टूबर को अपनी धान की फसल बेची थी, लेकिन अब तक करीब 6 लाख रुपये का भुगतान नहीं हुआ है.

किसान ने बताया कि भुगतान में देरी से उन किसानों को आर्थिक परेशानी हो रही है, जो अपनी जरूरतों के लिए समय पर मिलने वाले पैसे पर निर्भर रहते हैं. करनाल जिले में धान की खरीद की जिम्मेदारी तीन एजेंसियों के पास है. इनमें खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (HWC) और हैफेड शामिल हैं. खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 2.85 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की है, जिसमें से 2.09 लाख मीट्रिक टन का उठान हुआ है. इस एजेंसी ने किसानों को 469 करोड़ रुपये का भुगतान किया है.

वहीं, हैफेड ने 1.23 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा है और 1.05 लाख मीट्रिक टन का उठान किया है. एजेंसी ने किसानों को 247.42 करोड़ रुपये दिए हैं. हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन ने 1.49 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की है, जिसमें से 1.13 लाख मीट्रिक टन का उठान हुआ है. इस एजेंसी ने किसानों को 262.84 करोड़ रुपये का भुगतान किया है. इस बीच, भारतीय किसान यूनियन (सर छोटूराम) ने धान खरीद की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. यूनियन के प्रवक्ता बहादुर सिंह मेहला ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई किसानों को धान की खरीद पूरी होने के 15 दिन से ज्यादा समय बाद भी भुगतान नहीं मिला है.

उन्होंने कहा कि किसानों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ रही है. एक तरफ मंडियों से धान का समय पर उठान नहीं हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ फसल बेचने के बाद भी पैसा उनके बैंक खातों में नहीं पहुंच रहा है. उन्होंने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें खरीद के 24 से 72 घंटे के भीतर भुगतान करने की बात कही जाती है. हालांकि, ट्रांसपोर्टरों ने धान का उठान धीमा होने के पीछे तकनीकी दिक्कतों और गेट पास जारी करने की लंबी प्रक्रिया को जिम्मेदार बताया है.

उनका कहना है कि ट्रकों को मंडी से बाहर निकालने के लिए पहले अधिकारियों से मंजूरी लेनी पड़ती है. इसके बाद मिलर्स धान उतारने के बाद पोर्टल पर इसकी जानकारी दर्ज करते हैं. इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय लग रहा है. इससे वाहन उपलब्ध होने के बावजूद धान का उठान प्रभावित हो रहा है. वहीं, करनाल के उपायुक्त डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने कहा कि खरीद एजेंसियों को धान का उठान तेज करने और किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.

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