एग्रीवेट: राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (एनएचआरडीएफ), नई दिल्ली द्वारा 26 से 30 अक्टूबर, 2026 तक एनएचआरडीएफ मुख्यालय, नई दिल्ली में “मशरूम उत्पादन प्रौद्योगिकी एवं कटाई उपरांत प्रबंधन” विषय पर पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया. प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिल्ली, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश से कुल 33 प्रतिभागियों ने भाग लिया.
कार्यक्रम का उद्घाटन एम. के. मिश्रा, पूर्व निदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया.
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प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के साथ-साथ किसानों की आय एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए मशरूम उत्पादन को एक सतत एवं लाभकारी उद्यम के रूप में प्रोत्साहित करना था. प्रतिभागियों को धान एवं गेहूँ के पुआल जैसे कृषि अवशेषों का उपयोग करके वैज्ञानिक विधि से मशरूम उत्पादन करने तथा फसल अवशेषों को जलाने के पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में मशरूम उत्पादन की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी गई. इसके अतिरिक्त, मशरूम प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, विपणन तथा मशरूम उद्यम स्थापित करने के लिए उपलब्ध विभिन्न सरकारी सहायता योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई.
तकनीकी सत्रों का संचालन एस. सी. तिवारी, सहायक निदेशक एवं प्रशिक्षण समन्वयक द्वारा किया गया. इन सत्रों में बटन, ऑयस्टर (ढींगरी), मिल्की एवं शिटाके मशरूम की खेती, उत्पादन तकनीक, स्पॉन प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण, कटाई उपरांत प्रबंधन तथा व्यावसायिक उत्पादन की उन्नत विधियों पर विस्तृत जानकारी दी गई.
समापन समारोह के अवसर पर हरी कल्लीकट, भारतीय प्रक्षाशनिक अधिकारी, जिला मजिस्ट्रेट, पश्चिमी दिल्ली ने एनएचआरडीएफ की मशरूम स्पॉन प्रयोगशाला, बीज परीक्षण प्रयोगशाला एवं उद्यानिकी संग्रहालय का भ्रमण किया. उन्हें संस्थान की प्रमुख गतिविधियों तथा मशरूम उत्पादन एवं प्रसार से संबंधित कार्यों की जानकारी दी गई.
अपने संबोधन में हरी कल्लीकट ने भारत में मशरूम उत्पादन एवं खपत की वर्तमान स्थिति, इसकी बढ़ती मांग तथा बाजार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला. उन्होंने मशरूम उत्पादन को लाभकारी एवं रोजगारपरक उद्यम के रूप में विकसित करने की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया. इस अवसर पर डॉ. पी. के. गुप्ता, निदेशक, एनएचआरडीएफ द्वारा कालीकट को पौधा एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया.
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ. पी. के. गुप्ता ने मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में हरी कल्लीकट की उपलब्धियों एवं योगदान की सराहना की. उन्होंने मशरूम उत्पादन को आय एवं रोजगार सृजन का एक प्रभावी माध्यम बताते हुए प्रशिक्षणार्थियों को स्वयं की मशरूम उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने तथा प्रशिक्षण के दौरान अर्जित तकनीकी ज्ञान को किसानों एवं ग्रामीण युवाओं तक पहुँचाने के लिए प्रेरित किया.
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्राप्त तकनीकी जानकारी एवं व्यावहारिक अनुभव की सराहना की. उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण से मशरूम उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं विपणन संबंधी उनके ज्ञान में वृद्धि हुई है तथा सफल मशरूम उद्यम स्थापित करने के लिए उनके कौशल को भी बढ़ावा मिला है.
इस अवसर पर हरी कल्लीकट, जिला मजिस्ट्रेट, पश्चिमी दिल्ली द्वारा प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए.