एग्रीवेट: तेलंगाना में अच्चछी क्वालिटी वाले धान की मांग अचानक बढ़ गई है. इसके चलते निजी व्यापारी किसानों से धान 3700 रुपये प्रति क्विंटल तक खरीद रहे हैं. पिछले साल के धान का भाव करीब 4,000 रुपये प्रति क्विंटल था. इस बार व्यापारी बाजार में चल रहे भाव से ज्यादा कीमत दे रहे हैं. खास बात यह है कि व्यापारी 20 फीसदी तक नमी वाला ताजा धान भी खरीदने को तैयार हैं, जबकि सरकारी खरीद के लिए धान में नमी की अधिकतम सीमा 14 फीसदी तय है.
धान की खेती में कमी को इसकी बढ़ती मांग की एक वजह माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि अल नीनो के प्रभाव से धान की बुवाई प्रभावित हुई है. ऐसे में निजी व्यापारी अगली फसल के सीजन में मांग बढ़ने की उम्मीद में अभी से धान खरीदकर उसका भंडारण कर रहे हैं. इससे अच्छी गुणवत्ता वाले धान की कीमतों में तेजी आई है. मौजूदा सीजन में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है. तेलंगाना सरकार किसानों को 500 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी दे रही है. इससे धान की कुल कीमत 2,900 रुपये प्रति क्विंटल हो जाती है.
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खास बात यह है कि पूर्ववर्ती वारंगल जिले में निजी व्यापारी अच्छी गुणवत्ता वाले धान के लिए करीब 3,700 रुपये प्रति क्विंटल तक दे रहे हैं. वे ऐसा धान भी खरीद रहे हैं, जिसमें नमी की मात्रा सरकारी खरीद के तय मानकों से ज्यादा है. सरकारी खरीद केंद्रों पर 14 फीसदी तक नमी वाला धान ही खरीदा जाता है, जबकि निजी व्यापारी 20 फीसदी तक नमी वाला धान खरीदने को तैयार हैं.
निजी व्यापारी किसानों को सरकारी खरीद मूल्य से करीब 800 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा कीमत दे रहे हैं. वे अधिक नमी वाला ताजा धान भी खरीदने को तैयार हैं. व्यापारी अगले सीजन की जरूरत को देखते हुए अभी से धान का स्टॉक जुटा रहे हैं. किसानों ने धान की कटाई शुरू कर दी है. कई किसान अपनी उपज का कुछ हिस्सा भविष्य के लिए रखना चाहते हैं. लेकिन निजी व्यापारियों की ओर से मिल रही ऊंची कीमत के कारण किसान धान बेचने पर भी विचार कर रहे हैं. हालांकि, वे अपनी जरूरत और अगले सीजन के लिए कुछ धान बचाकर रखना चाहते हैं.
हनमकोंडा जिले के पेद्दापेंडियाला गांव के किसान टी. रविंदर ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि निजी व्यापारी किसानों से संपर्क कर रहे हैं और ताजा कटे धान के लिए ज्यादा कीमत देने की पेशकश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि किसानों को घर के खर्च के लिए पैसों की जरूरत है, लेकिन वे अपनी पूरी उपज बेचने से बच रहे हैं. किसान अगले सीजन के लिए भी कुछ धान बचाकर रखना चाहते हैं. उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि व्यापारियों ने जानबूझकर धान की मांग बढ़ाई है, जिससे इसकी कीमतों में तेजी आई है. व्यापारियों को अच्छी गुणवत्ता वाला चावल 8,000 रुपये प्रति क्विंटल तक बेचने से फायदा हो रहा है.