एग्रीवेट: वायु प्रदूषण की रोकथाम और खेत की मिट्टी को उर्वरक बनाए रखने के लिए किसानों से खेतों में पराली नहीं जलाने की अपील की गई है. मध्य प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिलाधिकारियों ने बिना स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के कंबाइन मशीन से धान कटाई पर रोक लगा दी है. इसके अलावा पराली जलाते पकड़े जाने पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही दोषी किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित किए जा सकते हैं.
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में पराली जलाने के मामले शून्य करने के लिए सख्ती बढ़ा दी है. सरकारी आदेश में पराली जलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है. सीधी जिले के कलेक्टर विकास मिश्रा ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है. उन्होंने मीडिया से कहा कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने से बचाने और खेतों में मित्र कीटों को मारे जाने से बचाने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है. गांवों और पंचायतों में कार्यक्रमों के जरिए किसानों को सूचित किया जा रहा है.
कलेक्टर ने कहा कि कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई के दौरान स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम, स्ट्रा रीपर या बेलर का उपयोग अनिवार्य किया गया है. उन्होंने कहा कि जिले में तेजी से धान की कटाई चल रही है. अन्य खरीफ फसलों की कटाई भी जारी है. किसान कंबाइन मशीन से फसलें कटवा रहे हैं, जिससे डंठल खेत में ही रह जाते हैं, जिन्हें किसान आग लगाकर जला देते हैं और प्रदूषण फैलाकर पर्यावरण को दूषित करते हैं. जिले में नरवाई और पराली जलाने पर रोक लगाने के प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं.
सरकार के आदेश पर सीधी जिले के कलेक्टर विकास मिश्रा ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया.
आदेश के अनुसार नरवाई जलाने पर दो एकड़ से कम भूमि वाले किसानों से 2,500 रुपये, दो से पांच एकड़ तक 5,000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक भूमि पर 15,000 रुपये पर्यावरण क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी. इसके अलावा दोषी पाए जाने पर किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने से भी वंचित किया जा सकता है. प्रशासन ने निगरानी बढ़ाते हुए किसानों से फसल अवशेष नहीं जलाने की अपील की.