देश के जलाशयों में सिर्फ 67 फीसदी पानी, पिछले साल से काफी कम भंडार.. आगे बढ़ सकती है परेशानी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: आने वाले महीनों में पानी की किल्लत हो सकती है. केंद्रीय जल आयोग (CWC) के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 178 प्रमुख जलाशयों में पानी का भंडार इस सप्ताह और घट गया है. इन जलाशयों में कुल क्षमता का 67 फीसदी पानी बचा है. जलाशयों की कुल क्षमता 184.762 अरब घन मीटर (BCM) है, जबकि मौजूदा जल भंडार घटकर 123.228 अरब घन मीटर रह गया है. आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले जलाशयों में पानी का स्तर 26.5 प्रतिशत अंक कम है. वहीं, पिछले 10 साल के औसत स्तर से यह 18.5 प्रतिशत अंक नीचे है. देश के मध्य क्षेत्र को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में जलाशयों का भंडार उनकी कुल क्षमता के 80 फीसदी से कम है. इससे जल उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ सकती है.

तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के जलाशयों में पानी का स्तर चिंताजनक बना हुआ है. इन राज्यों के बांधों में उनकी कुल क्षमता के एक-तिहाई से भी कम पानी बचा है. केंद्रीय जल आयोग (CWC) के आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण भारत के जलाशयों में कुल क्षमता का केवल 42 फीसदी पानी बचा है. इस क्षेत्र की कुल भंडारण क्षमता 55.879 अरब घन मीटर है, जबकि मौजूदा जल भंडार 23.659 अरब घन मीटर दर्ज किया गया है.

देश में पूरी क्षमता तक भरे जलाशयों की संख्या घटकर 11 रह गई है. इनमें से चार जलाशय झारखंड में हैं. तमिलनाडु का अलीयार बांध अब भी खाली है. राज्य के बाकी आठ जलाशयों में से छह में उनकी कुल क्षमता के एक-चौथाई से भी कम पानी बचा है. इससे दक्षिण भारत में जल उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है.

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान सामान्य से 15 फीसदी कम बारिश हुई. मॉनसून के बाद भी बारिश की कमी बनी हुई है. 1 से 21 अक्टूबर के बीच देश के 734 जिलों में से 75 फीसदी जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई. मौसम विभाग ने अगले सप्ताह की शुरुआत तक तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटीय आंध्र प्रदेश और केरल में बारिश होने का अनुमान जताया है. देश के पूर्वी हिस्सों में भी बारिश हो सकती है. इससे दक्षिण भारत के जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ने और जल भंडारण की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है. साथ ही IMD ने कहा है कि उत्तर भारत में एक बार फिर नया पश्चिमी विक्षोभ मौसम को प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा, बंगाल की खाड़ी और तमिलनाडु के पास कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है. इसके असर से पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश की संभावना है.

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