एग्रीवेट: 22 अक्टूबर 2026, बालाघाट: बालाघाट के नक्सल प्रभावित रहे 100 गांवों की बदलेगी तस्वीर, कृषि आधारित रोजगार व उद्यमों को मिलेगा बढ़ावा: हर गांव के लिए बनेगा आदर्श प्रोजेक्ट – मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के नक्सल प्रभावित रहे 100 गांवों में कृषि एवं उससे जुड़े व्यवसायों के माध्यम से आजीविका के नए अवसर विकसित किए जाएंगे। इन गांवों की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने और ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन और तिलहन फसलों पर आधारित विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके तहत प्रत्येक गांव के लिए एक आदर्श प्रोजेक्ट बनाया जाएगा, ताकि स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार रोजगार और उद्यम स्थापित किए जा सकें। यह निर्देश कलेक्टर आदित्य सिंह ने 19 अक्टूबर को कृषि एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक में दिए। बैठक में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की तैयारियों, रबी फसलों की बुवाई, किसानों को कृषि आधारित व्यवसायों से जोड़ने और नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।
कलेक्टर आदित्य सिंह ने कहा कि जिले की 70 से 80 प्रतिशत आर्थिक गतिविधियां किसानों और कृषि पर आधारित हैं। ऐसे में कृषि को केवल परंपरागत खेती तक सीमित न रखते हुए उसे व्यवसाय और उद्यमिता से जोड़ने की आवश्यकता है। किसानों को नगदी फसलों, कृषि विविधीकरण और नवाचारों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि उनकी आय बढ़ने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो सके। उन्होंने कहा कि जिले के नक्सल प्रभावित रहे 100 गांवों में विकास की अपार संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों, भौगोलिक परिस्थितियों और ग्रामीणों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार की जाएं, जिससे लोगों को अपने गांव में ही रोजगार मिल सके। इसके लिए प्रत्येक गांव में कृषि एवं उससे संबंधित गतिविधियों पर आधारित आदर्श प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा। इन परियोजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध कराना और उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है।
कलेक्टर ने नक्सल प्रभावित रहे गांवों में आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूहों के माध्यम से बड़े पैमाने पर मुनगा के पौधे लगाने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, मछली पालन, उद्यानिकी और तिलहन फसलों पर आधारित व्यवसायों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इन गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर विकसित किए जा सकते हैं। कलेक्टर ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से ऐसे प्रकरण तैयार करने के निर्देश दिए, जिनके माध्यम से ग्रामीण छोटे कृषि आधारित उद्यम स्थापित कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्ययोजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करने के लिए ठोस पहल की जाए।
बैठक में खरीफ विपणन वर्ष के दौरान समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि धान खरीदी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूरी कर ली जाएं। खरीदे गए धान के सुरक्षित भंडारण के लिए पर्याप्त गोदामों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने खरीदी केंद्रों से गोदामों तक धान पहुंचाने के लिए परिवहन की समुचित व्यवस्था करने पर भी जोर दिया, ताकि उपार्जन के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो। अधिकारियों को सभी तैयारियां निर्धारित समय सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए गए, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी का सामना न करना पड़े।
कलेक्टर आदित्य सिंह ने उप संचालक कृषि को आगामी 31 अक्टूबर को कृषि उपज मंडी गोंगलई में आयोजित होने वाले बलराम कृषि महोत्सव की सभी आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से किसानों तक कृषि संबंधी उपयोगी जानकारी और नवाचारों को पहुंचाया जाए। वहीं, उप संचालक मत्स्योद्योग को जिले के सभी तालाबों में मत्स्य पालन की संभावनाओं का उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर मत्स्य पालन को आजीविका और स्वरोजगार के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया जाए।
बैठक में फसल बीमा योजना की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने बीमा कंपनी के अधिकारी को निर्देश दिए कि बीमारी अथवा अन्य कारणों से प्रभावित फसलों के मामलों में पात्र किसानों के बीमा दावों की प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों को बीमा योजना का लाभ दिलाने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। कलेक्टर ने कृषि एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों से किसानों की आय बढ़ाने, कृषि आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित करने के लिए समन्वित प्रयास करने को कहा। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित रहे 100 गांवों के लिए तैयार की जाने वाली कार्ययोजना में स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए, ताकि इन क्षेत्रों में विकास के साथ ग्रामीणों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी मजबूत बनाया जा सके।