एग्रीवेट: देश में प्रीमियम किस्मों का धान उगाने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम से कम 1,000 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा भाव मिल रहा है. हालांकि, अल नीनो के असर से कम बारिश के कारण धान का उत्पादन प्रभावित हुआ है. ऐसे में आने वाले महीनों में सोना मसूरी और कोलम जैसी पसंदीदा किस्मों के चावल की कीमतें बढ़ सकती हैं. यानी इस बार धान उत्पादक किसानों की अच्छी कमाई होने वाली है.
दिल्ली के व्यापार विश्लेषक एस चंद्रशेखरन ने द बिजनेसलाइन से कहा कि फिलहाल किसानों को प्रीमियम धान के लिए 3,600 से 3,700 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहे हैं. यह सरकार की ओर से तय MSP से करीब 1,100 रुपये अधिक है. कुछ राज्यों में बोनस जोड़ने के बाद भी किसानों को इतना भाव मिलना बड़ी बात है. उन्होंने कहा कि किसानों को पहले इस तरह का फायदा देखने को नहीं मिला है.
एस चंद्रशेखरन के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के बापटला जिले की कई कृषि उपज मंडी समितियों (APMC) में BPT धान का औसत कारोबारी भाव 3,600 से 4,500 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज किया गया. वहीं, कर्नाटक की ज्यादातर मंडियों में धान के भाव 3,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर रहे. कुछ मंडियों में यह कीमत 5,200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई. सरकार ने चालू सीजन के लिए ग्रेड-A धान का MSP 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. ऐसे में प्रीमियम किस्मों की खेती करने वाले किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य से काफी ज्यादा भाव मिल रहा है. दूसरी ओर, कम बारिश से उत्पादन घटने की आशंका के कारण आने वाले महीनों में खास किस्मों के चावल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है.
दक्षिण भारत में धान का उत्पादन प्रभावित होने से सोना मसूरी और कोलम जैसी चावल की किस्में महंगी हो गई हैं. आने वाले कुछ महीनों तक कीमतों में तेजी जारी रहने की आशंका है. कर्नाटक, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों और तेलंगाना में कम बारिश के कारण धान का उत्पादन प्रभावित हुआ है. इसका असर चावल के निर्यात पर भी पड़ रहा है. कुछ निर्यातकों का कहना है कि चावल मिलों की ओर से दिए जाने वाले भाव एक दिन से भी कम समय तक मान्य रहते हैं. नई दिल्ली के निर्यातक राजेश पहाड़िया जैन के मुताबिक, उनके लिए मिलर्स की ओर से दिया गया भाव सिर्फ छह घंटे तक ही मान्य रहता है. इसकी वजह यह है कि कीमतें हर घंटे बदल रही हैं.
हालांकि, चावल निर्यात से जुड़े सभी कारोबारियों की राय एक जैसी नहीं है. द राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (TREA) के अध्यक्ष बीवी कृष्णा राव ने कहा कि भाव मान्य रहने के लिए कोई तय नियम नहीं है. कई मामलों में भाव 24 घंटे से ज्यादा समय तक भी मान्य रह सकता है. उन्होंने कहा कि अगर फोन पर ही खरीदार और विक्रेता के बीच सौदा तय हो जाता है, तो भाव की वैधता को लेकर कोई समस्या नहीं होनी चाहिए. यानी चावल की कीमत कितनी देर तक मान्य रहेगी, यह कारोबार की स्थिति और मिलर्स, व्यापारियों व ब्रोकरों के आपसी संबंधों पर भी निर्भर करता है.
नई दिल्ली के निर्यातक राजेश पहाड़िया जैन के मुताबिक, पिछले दो सप्ताह में सामान्य उबले चावल की कीमत 100 रुपये प्रति क्विंटल बढ़कर 3,550 रुपये हो गई है. वहीं, सफेद चावल का भाव 3,200 रुपये से बढ़कर 3,350 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है. निर्यात बाजार में 5 फीसदी टूटे दानों वाले उबले चावल का भाव 395 डॉलर प्रति टन है. वहीं, 5 फीसदी टूटे दानों वाले सफेद चावल की कीमत 380 डॉलर प्रति टन से अधिक बताई गई है.