गन्ना मूल्य पर सरकार का बड़ा निर्णय, रमेश चंद के नेतृत्व में बनी समिति किसानों से बात करेगी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: गन्ना मूल्य बढ़ोत्तरी की मांग को लेकर केंद्र सरकार ने समिति का गठन करने का ऐलान किया है. नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है. रमेश चंद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के निदेशक समेत कई अहम पद संभाल चुके हैं. समिति में शामिल सभी सदस्य किसानों से बात करेगी और गन्ना मूल्य बढ़ाने समेत अन्य मुद्दों पर विचार करेगी. बता दें कि गन्ना कीमतों को लेकर किसान आंदोलित हैं और महाराष्ट्र, कर्नाटक में कुछ दिनों से लगातार प्रदर्शन चल रहे हैं. इसके चलते महाराष्ट्र में आज से शुरू हुए पेराई सीजन के पहले दिन 55 में से केवल 15 चीनी मिलें ही चल पाईं. किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि जब तक मूल्य नहीं बढ़ाया जाता है तब तक पेराई नहीं होने देंगे.

किसानों के विरोध और गन्ना मूल्य को लेकर की जा रही मांगों पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार ने बुधवार को नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित की है. समिति गन्ना किसानों, विशेषकर कर्नाटक और महाराष्ट्र के कृषकों की मांगों पर विचार करेगी और उनकी समस्याओं के समाधान के उपाय सुझाएगी.

खाद्य मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार यह कदम दोनों राज्यों के गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी के बीच हुई बैठक के बाद उठाया गया है. दोनों मंत्रियों ने 12 अक्टूबर को पूसा परिसर में गन्ना उत्पादक इन दोनों प्रमुख राज्यों के किसानों के प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत चर्चा की थी. बैठक में विभिन्न संगठनों के लगभग 80 से 90 किसान और राज्य सरकारों के मंत्री शामिल हुए थे.

किसानों ने उत्पादन लागत बढ़ने का हवाला देते हुए गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग की है. उन्होंने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को भी मौजूदा 31 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग की है. इसको लेकर किसान महाराष्ट्र और कर्नाटक के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे हैं. आरोप है कि महाराष्ट्र में किसानों ने पहले दिन 40 चीनी मिलों को चलने नहीं दिया. राज्य की कुल 55 में केवल 15 मिलें ही चल सकीं.

खाद्य मंत्रालय के बयान के अनुसार समिति खेती की लागत और अन्य प्रासंगिक कारकों को ध्यान में रखते हुए किसानों को अधिक लाभकारी मूल्य दिलाने की मांग पर विचार करेगी. समिति उत्पादन लागत, बाजार से होने वाली प्राप्तियों और चीनी मिलों की वित्तीय व्यवहार्यता को ध्यान में रखते हुए मिल से बिक्री के स्तर पर चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन की मांग की भी समीक्षा करेगी.

समिति चीनी की रिकवरी (गन्ने से प्राप्त चीनी की मात्रा) की जांच और रिपोर्टिंग की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करेगी तथा पारदर्शी सत्यापन पक्का करने के उपाय सुझाएगी. वह मिलों में गन्ने की तौल की प्रक्रियाओं का भी आकलन करेगी. समिति मशीनों से काटे गए गन्ने के वजन में की जाने वाली कटौती से संबंधित प्रक्रियाओं की भी जांच करेगी और यह आकलन करेगी कि मशीनी कटाई से वास्तव में कोई नुकसान होता है या नहीं तथा यदि होता है, तो उसकी मात्रा कितनी है.

समिति यह भी आकलन करेगी कि मौजूदा प्रक्रियाओं का किसानों को देय गन्ना मूल्य पर क्या प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा, समिति आवश्यक समझे जाने वाले अन्य संबंधित मुद्दों पर भी विचार कर सकती है. समिति किसानों के प्रतिनिधियों, चीनी मिल संघों, राज्य सरकारों तथा अन्य विशेषज्ञों और संगठनों सहित सभी संबंधित पक्षों से परामर्श करेगी. वह अपने निष्कर्षों और विशिष्ट सिफारिशों के साथ रिपोर्ट पेश करेगी.

प्रख्यात कृषि अर्थशास्त्री और लोक नीति विशेषज्ञ रमेश चंद वर्ष 2015 से 2026 तक नीति आयोग के सदस्य रहे हैं. वह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र एवं नीति अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-एनआईएपी) के निदेशक और 15वें वित्त आयोग के सदस्य के रूप में भी काम कर चुके हैं. उन्हें कृषि विकास, किसानों से जुड़े मुद्दों, खाद्य सुरक्षा, कृषि बाजारों और मूल्य निर्धारण नीति के क्षेत्र में व्यापक विशेषज्ञता हासिल है. समिति के अन्य सदस्यों में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि आयुक्त, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव (चीनी) और उपभोक्ता मामलों के विभाग के संयुक्त सचिव (विधिक माप विज्ञान) शामिल हैं.

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