कान्हा में 100 साल बाद लौटे जंगली भैंसे, क्या बढ़ेगी जैव विविधता और पर्यटन? – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Kanha Tiger Reserve: असम के काजीरंगा से 2220 किलोमीटर दूर लाए गए 8 जंगली भैंसों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सॉफ्ट रिलीज किया है. इनमें 6 मादा और 2 नर हैं. भारतीय वन्यजीव संस्थान के अध्ययन में कान्हा का वातावरण इनके लिए अनुकूल पाया गया है. मध्यप्रदेश और असम के बीच वन्यजीवों के आदान-प्रदान की इस पहल से जैव विविधता और पर्यटन को कितना फायदा मिलेगा? क्या कान्हा टाइगर रिजर्व में 100 साल बाद जंगली भैंसों की वापसी से जंगल का इकोसिस्टम बदलने वाला है?

कान्हा टाइगर रिजर्व  में लाए गए 8 जंगली भैंसों में 6 मादा और 2 नर शामिल हैं. इन्हें असम के काजीरंगा टाइगर रिजर्व से दो चरणों में मध्यप्रदेश लाया गया. पहली खेप 28 अप्रैल 2026 और दूसरी खेप 9 मई 2026 को पहुंची थी. इस दौरान वन्यजीव डॉक्टरों की विशेष टीम ने उनकी सेहत और सुरक्षा पर नजर रखी. कान्हा पहुंचने के बाद भैंसों को पहले छोटे बाड़े में रखा गया, ताकि वे नए वातावरण के अनुकूल हो सकें. अब बारिश के बाद उन्हें 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में स्थानांतरित किया गया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया. सॉफ्ट रिलीज का उद्देश्य वन्यजीवों को सुरक्षित माहौल में धीरे-धीरे नए स्थान के अनुकूल बनाना है.

मध्यप्रदेश के जंगलों में जंगली भैंसों  की आबादी करीब एक सदी पहले खत्म हो गई थी. अब इन्हें दोबारा बसाने के लिए कान्हा को चुना गया है. भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के अध्ययन में यहां के घास के मैदानों, पानी के स्रोतों और प्राकृतिक वातावरण को इनके लिए अनुकूल पाया गया है. जंगली भैंसों की वापसी से कान्हा के प्राकृतिक इकोसिस्टम को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है. वन विभाग इनके व्यवहार, सेहत और नए वातावरण में ढलने की निगरानी कर रहा है. यह देखना भी जरूरी होगा कि वे यहां सफलतापूर्वक रह पाते हैं या नहीं.

इस पहल के तहत मध्यप्रदेश और असम  के बीच वन्यजीवों के आदान-प्रदान की योजना भी जुड़ी है. इसके तहत मध्यप्रदेश की ओर से असम को बाघ और मगरमच्छ दिए जाने हैं, जबकि असम से जंगली भैंसों के अलावा गैंडे और अन्य वन्यजीव लाने की योजना है. इस तरह के सहयोग से अलग-अलग राज्यों में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाया जा सकता है. हालांकि, अलग-अलग प्रजातियों को नए स्थान पर बसाने के लिए उनके प्राकृतिक आवास, स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है.

मध्यप्रदेश सरकार ने अगले तीन साल में कान्हा टाइगर रिजर्व में कुल 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य रखा है. फिलहाल पहले लाए गए 8 भैंसों के नए वातावरण में अनुकूलन पर ध्यान दिया जा रहा है. उनकी सफलता के आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी. जंगली भैंसों की वापसी  से जैव विविधता और प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला को मजबूती मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा, मध्यप्रदेश पहले से ही बाघों के लिए प्रसिद्ध है. ऐसे में जंगली भैंसों की सफल वापसी कान्हा के वन्यजीव पर्यटन के लिए भी नया आकर्षण बन सकती है. हालांकि, इसके वास्तविक परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि भैंसे यहां कितनी अच्छी तरह बसते हैं और उनकी आबादी कितनी बढ़ती है.

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