एग्रीवेट: 14 अक्टूबर 2026, छिंदवाड़ा: छिंदवाड़ा: खाद, बीज व्यापारी संघ एवं कृषि वैज्ञानिकों के साथ बैठक संपन्न – कार्यालय उप संचालक छिंदवाड़ा में रबी सीजन की तैयारी के संबंध में उप संचालक कृषि श्री मोरिस नाथ की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के खाद-बीज व्यापारी संघ, कृषि विज्ञान केन्द्र चंदनगांव, आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र के वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों के साथ बीज की उपलब्धता तथा रबी फसलों की तैयारी पर चर्चा की गई।
इस वर्ष सामान्य वर्षा की तुलना में कम बारिश होने के कारण रबी सीजन में सिंचाई जल की उपलब्धता सीमित रहने की संभावना है। वर्तमान में जिले में कुल 832.00 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि औसत वर्षा 1059.00 मिमी है। इस स्थिति को देखते हुए उपलब्ध मिट्टी की नमी एवं सिंचाई जल के अनुसार रबी फसलों और उनकी उपयुक्त किस्मों का चयन करने पर जोर दिया गया।
बैठक में कृषि वैज्ञानिकों ने सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में चना, सरसों, मसूर एवं अलसी जैसी फसलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी। ऐसी फसलों एवं किस्मों का चयन करने पर चर्चा की गई, जो कम अवधि में तैयार हो जाएं और नमी की कमी की स्थिति में भी अपेक्षाकृत अच्छा उत्पादन दे सकें। साथ ही कम पानी एवं सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए चना, सरसों और मसूर के बीजों की किस्मवार उपलब्धता का आकलन किया गया।
आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र चंदन गांव की कृषि वैज्ञानिक डॉ. शिखा शर्मा ने बताया कि जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे भी जल स्तर में गिरावट की संभावना को देखते हुए सिंचाई जल का संरक्षण करें। किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली एवं कम अवधि की किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई, ताकि एक या दो सिंचाई उपलब्ध होने पर भी उत्पादन प्राप्त किया जा सके।
कृषि विज्ञान केंद्र चंदन गांव की कृषि वैज्ञानिक डॉ. सरिता सिंह ने उपलब्ध मिट्टी की नमी का बेहतर उपयोग करने के लिए समय पर बुवाई, उचित बीज दर तथा खेत में नमी संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने उपलब्ध सिंचाई जल का उपयोग फसल की महत्वपूर्ण अवस्था में प्राथमिकता से करने की सलाह दी।
उप संचालक कृषि श्री मोरिस नाथ ने किसानों से अपील की कि वे रबी सीजन में पानी की उपलब्धता के अनुसार ही फसलों का चयन करें। उन्होंने माइक्रो इरीगेशन को बढ़ावा देने तथा स्प्रिंकलर के माध्यम से उपलब्ध सिंचाई जल का उपयोग करने के लिए किसानों को जागरूक करने पर जोर दिया।
बैठक में सहायक कृषि यंत्री श्री अश्विनी सिंह ने आगामी रबी सीजन में उपलब्ध नमी को संरक्षित करने एवं नरवाई प्रबंधन के लिए जीरो टिलेज पद्धति अपनाने की सलाह दी। उन्होंने खरीफ फसलों के अवशेषों का उचित प्रबंधन करते हुए रबी फसलों की बोनी करने पर जोर दिया। बैठक में कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विभाग के अधिकारियों, खाद-बीज व्यापारी संघ के अध्यक्ष श्री शिवकुमार शर्मा, व्यापारीगण, फसल बीमा कंपनी के प्रतिनिधि एवं सहायक कृषि यंत्री उपस्थित थे।