भूमि मुआवजे में हेरफेर के खिलाफ सड़कों पर किसान, चिंकी परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोप—देखें क्या है पूरा सच – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: मध्य प्रदेश के रायसेन में चिंकी बहुउद्देशीय परियोजना के तहत मुआवजे में हेरफेर किए जाने को लेकर किसानों ने जमकर हंगामा किया. सैकड़ों की संख्या में सड़कों पर उतरे किसानों ने मोहन यादव सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. किसानों का आरोप है कि परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के दौरान बाजार से 4 गुना मुआवजा देने का वादा किया गया था, लेकिन अब किसानों को आधा ही मुआवजा दिया जा रहा है. किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में जुटे किसानों ने परियोजना, विस्थापन और अधिग्रहण प्रक्रियाओं में भयंकर अनियमितता के आरोप लगाए हैं.

किसान मजदूर मोर्चा (KMM) भारत के घटक संगठन राष्ट्रीय किसान संगठन के आह्वान पर हजारों की संख्या में किसानों ने रायसेन जिले के उदयपुरा में प्रदर्शन किया. संगठन ने कहा कि उदयपुरा तहसील के तहत निर्माणाधीन चिंकी बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर क्षेत्रीय किसानों में भारी आक्रोश है. प्रदर्शन के दौरान किसानों ने परियोजना एवं भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में हो रही गंभीर अनियमितताओं को लेकर प्रशासन पर तीखे आरोप लगाए. बता दें कि मध्य प्रदेश सरकारी की यह एक प्रमुख सिंचाई और जलविद्युत परियोजना है.

किसानों ने कहा कि प्रशासन की ओर यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा है कि कुल कितनी भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा, जिससे किसान असमंजस और अनिश्चितता के माहौल में हैं.

भूमि का मूल्यांकन वर्तमान बाजार दर (मार्केट रेट) के बजाय बहुत कम कलेक्टर रेट पर किया जा रहा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है.

किसानों ने कहा कि 22 अप्रैल 2026 को मध्य प्रदेश कैबिनेट द्वारा भूमि अधिग्रहण का मुआवजा 4 गुना करने का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया था. इसके बावजूद, इस परियोजना में किसानों को केवल 2 गुना मुआवजा दिया जा रहा है और कैबिनेट के नियम को लागू नहीं किया जा रहा है.

किसान संगठन ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि है कि जिन किसानों की पूरी की पूरी जमीन अधिग्रहित की जा रही है और वे पूरी तरह भूमिहीन हो रहे हैं, उन्हें भी प्रशासन द्वारा विस्थापित नहीं माना जा रहा है और न ही विस्थापन के लाभ दिए जा रहे हैं.

किसान लगातार लिखित आपत्तियाँ दर्ज करा रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन द्वारा उनकी आपत्तियों और शिकायतों पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है.

राष्ट्रीय किसान संगठन के नेताओं ने चेतावनी दी है कि सरकार मध्य प्रदेश कैबिनेट के 22 अप्रैल 2026 के फैसले के तहत 4 गुना मुआवजा लागू करे, विस्थापितों को उचित पुनर्वास दे और किसानों की सभी आपत्तियों का पारदर्शी निपटारा करे. यदि मांगों पर शीघ्र अमल नहीं किया गया, तो किसान मजदूर मोर्चा (KMM) भारत के बैनर तले इस आंदोलन को संपूर्ण मध्य प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक उग्र किया जाएगा.

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