एग्रीवेट: 05 नवंबर 2026, नई दिल्ली: कृषि विज्ञान केन्द्र काफलीगैर में संपन्न हुआ 7 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम, किसानों को बांटे गए उन्नत बीज व उपकरण – भाकृअनुप के कृषि विज्ञान केन्द्र, काफलीगैर में अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत पशुधन आधारित समेकित खेती की तकनीकों पर आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हुआ। 21 से 29 अक्टूबर 2026 तक चले इस कार्यक्रम में जिले के 8 गांवों के कुल 25 किसानों ने भाग लिया। समापन अवसर पर प्रतिभागी किसानों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र के साथ उन्नत बीज, कृषि सामग्री और अन्य उपयोगी उपकरण वितरित किए गए।
यह कार्यक्रम भाकृअनुप–विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस), अल्मोड़ा के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत के निर्देशन और कृषि विज्ञान केन्द्र, काफलीगैर के नोडल अधिकारी डॉ. निर्मल हेडाऊ के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य किसानों को पशुपालन और कृषि आधारित आजीविका की उन्नत तकनीकों से परिचित कराना तथा समेकित कृषि प्रणाली अपनाकर उनकी आय और उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना था।
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प्रशिक्षण के दौरान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. राज कुमार ने पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी की उन्नत तकनीकों के बारे में बताया। उन्होंने फलों के कलमी पौधे तैयार करने की विधियों, कृषि उत्पादन के बेहतर प्रबंधन और फलों एवं सब्जियों की उत्पादकता बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को स्थानीय जलवायु और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार वैज्ञानिक तकनीकें अपनाने तथा उत्पादन लागत कम करने के लिए प्रेरित किया।
वहीं, पशु विज्ञान विषय वस्तु विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. नवल किशोर सिंह ने डेयरी व्यवसाय, मुर्गीपालन, मत्स्य सह बत्तख पालन, बकरीपालन, प्राकृतिक खेती और मौसमी चारा उत्पादन की तकनीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने पशुओं के रखरखाव, संतुलित आहार, स्वच्छता और रोगों की रोकथाम के उपाय भी बताए।
बागवानी विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. कमल कुमार पांडे ने फलदार पौधों, सब्जी उत्पादन और बेमौसमी सब्जियों की खेती के बारे में जानकारी दी। साथ ही पौधों की देखभाल, पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोगों से बचाव और प्रतिकूल मौसम में फसलों की सुरक्षा के तरीके समझाए। कृषि प्रसार विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. अमित कुमार ने कृषक उत्पादक संगठनों, कृषि व्यवसाय के विकास, मूल्य संवर्धन और कृषि उत्पादों के बेहतर विपणन के बारे में बताया।
प्रशिक्षण के तहत किसानों को दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया। इस दौरान उन्हें प्रगतिशील किसानों द्वारा अपनाई जा रही कृषि, पशुपालन और मत्स्यपालन की तकनीकों को देखने और उनसे संवाद करने का अवसर मिला।
भ्रमण के दौरान ग्राम मुझार चौरा के प्रगतिशील किसान लाल सिंह कठायत ने अपने प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया। उन्होंने किसानों को कीवी उत्पादन, जैविक तरीके से सब्जी उत्पादन, इलायची, धनिया और हल्दी जैसी मसाला फसलों की खेती, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण और सब्जी उत्पादन की विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी। इसके अलावा पशुपालन विभाग के उप-मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. के.के. जोशी, मत्स्यपालन विभाग के जिला मत्स्य अधिकारी मनोज सिंह मियान और कृषि विभाग के आत्मा के उप-परियोजना निदेशक धीरज बिष्ट ने ऑनलाइन माध्यम से किसानों के साथ संवाद किया।
कार्यक्रम के समापन पर किसानों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र, मिल्क केन, कृमिनाशक दवा, खनिज मिश्रण, मटर के बीज और गोभी के पौधे वितरित किए गए। इसके साथ ही उन्नत सब्जी उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए प्याज की वी.एल. प्याज-3 और मटर की वी.एल. मटर-13 किस्म के बीज भी दिए गए। इस पहल के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीकों को अपने खेतों और पशुपालन कार्यों में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।