एग्रीवेट: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में सूखे के हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. बारिश नहीं होने की वजह से खेतों में खड़ी फसलें और फलों के बाग पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं. किसानों ने खेती के लिए लाखों रुपये खर्च किए, बैंकों और निजी लोगों से कर्ज लिया, लेकिन फसल से कोई आमदनी नहीं हुई. अब किसानों के सामने कर्ज चुकाने और परिवार का खर्च चलाने का संकट खड़ा हो गया है. सूखे की स्थिति का जायजा लेने के लिए शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे ने छत्रपति संभाजीनगर जिले की वैजापुर और कन्नड़ तहसील का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने प्रभावित किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं. किसानों ने अपनी बर्बाद फसलों को दिखाते हुए बताया कि इस साल का सूखा पिछले कई वर्षों के मुकाबले बेहद गंभीर है.
वैजापुर तहसील के किसान संजय कांडे ने बताया कि उन्होंने करीब ढाई एकड़ में फलों का बाग लगाया है. इसमें से कुछ पेड़ पांच साल पुराने हैं, जबकि कुछ ढाई साल पहले लगाए गए थे. इन बागों पर अब तक करीब छह से साढ़े छह लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन बारिश नहीं होने की वजह से पूरा बाग सूख गया है. किसान के मुताबिक, इतना भयंकर सूखा उन्होंने अपनी 55 साल की उम्र में पहले कभी नहीं देखा.
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किसानों का कहना है कि सरकार ने दिवाली के लिए पांच हजार रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है, लेकिन इतनी बड़ी आर्थिक बर्बादी के सामने यह रकम बेहद कम है. किसानों ने पिछली बार भी नुकसान के बाद सरकार की ओर से मदद का आश्वासन मिलने की बात कही, लेकिन उनका दावा है कि उन्हें अब तक उस नुकसान का मुआवजा भी नहीं मिला है.
वहीं, किसान माणिक उत्तमराव निगुडे ने बताया कि उनके परिवार के बुजुर्ग 1962 के सूखे का जिक्र करते थे, लेकिन मौजूदा हालात में वे खुद अपनी आंखों से उससे भी भयावह स्थिति देख रहे हैं. कपास, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलें बर्बाद हो गई हैं. फलों के बाग भी पूरी तरह सूख चुके हैं. उन्होंने बताया कि उनके ऊपर तीन से चार लाख रुपये का कर्ज है. बैंक, सोसायटी और निजी लोगों से लिया गया कर्ज चुकाने के लिए अब उनके पास कोई आमदनी नहीं है. किसान ने सरकार से मांग की कि किसानों को कम से कम एक से डेढ़ लाख रुपये प्रति हेक्टेयर आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि किसान इस संकट से बाहर निकल सकें.
किसानों का दर्द सिर्फ फसल बर्बाद होने तक सीमित नहीं है. उनके सामने अब दिवाली जैसे त्यौहार को मनाने का भी संकट है. वैजापुर तहसील के किसान कडुबा एकनाथ बोरडे का कहना है कि किसान कर्ज लेकर त्योहार नहीं मनाता. जब किसान की जेब में पैसा होता है, तभी उसके लिए दिवाली होती है. इस बार फसल ही नहीं हुई, ऐसे में त्योहार मनाने के लिए पैसे कहां से लाएं?
मराठवाड़ा के किसानों की इन आपबीती से साफ है कि सूखे ने सिर्फ उनकी फसलें ही नहीं, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति को भी बुरी तरह प्रभावित किया है. किसान अब सरकार से सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल आर्थिक मदद और कर्ज से राहत की मांग कर रहे हैं. आदित्य ठाकरे के इस दौरे के दौरान किसानों ने अपनी बर्बाद फसलों और कर्ज की समस्या सामने रखी. अब देखना होगा कि किसानों की इन मांगों पर राज्य सरकार क्या कदम उठाती है. (इसरारुद्दीन चिश्ती की रिपोर्ट)