एग्रीवेट: 16 अक्टूबर 2026, रायसेन: रायसेन: 3 एकड़ जमीन पर बदला खेती का तरीका, अब सालाना 5 लाख रुपए तक कमा रहीं जानकी बाई – मध्यप्रदेश के रायसेन जिले के सिलवानी विकासखंड के ग्राम बेगवाकला की रहने वाली जानकी बाई ने खेती का तरीका बदलकर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि की है। पहले वे अपने पति के साथ पारंपरिक तरीके से खेती करती थीं, जिससे परिवार का गुजारा करना मुश्किल होता था। लेकिन कृषि विभाग के मार्गदर्शन और उन्नत कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने सब्जी की खेती, मछली पालन, पशुपालन और बागवानी को अपनाया। इसका परिणाम यह हुआ कि उनकी सालाना आय पहले के लगभग 1 लाख रुपये से बढ़कर अब 4 से 5 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
जानकी बाई ने बताया कि उनके परिवार के पास तीन एकड़ कृषि भूमि है। पहले वे इस जमीन पर पारंपरिक तरीके से खेती करती थीं, लेकिन इससे होने वाली आमदनी सीमित थी। इसी दौरान गांव में आयोजित शिविर में उन्हें सरकार की किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने कृषि विभाग के विकासखंड कार्यालय से संपर्क किया। यहां आत्मा परियोजना के बीटीएम रघुवीर सिंह कुशवाह ने उन्हें उन्नत कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी। इसके बाद जानकी बाई और उनके पति ने कृषि विज्ञान केंद्र, नकतरा और बनखेड़ी में प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने सब्जी की खेती शुरू की, जिससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी होने लगी।
जानकी बाई ने खेती के साथ आमदनी के दूसरे स्रोत भी विकसित किए। उन्होंने बताया कि बलराम तालाब योजना के अंतर्गत वर्ष 2023 में एक एकड़ में तालाब का निर्माण कराया और मछली पालन शुरू किया। इससे उन्हें हर साल लगभग डेढ़ लाख रुपये की आय होती है। उनका बेटा भी कृषि कार्य में रुचि रखता है। उसने सरकारी योजना के तहत करनाल में उन्नत कृषि का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके अलावा झांसी में मछली पालन और डेयरी पालन का प्रशिक्षण भी लिया। परिवार के सदस्यों ने प्रशिक्षण से मिली जानकारी का उपयोग खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में किया।
जानकी बाई ने अपने खेत में नेट हाउस भी बनाया है, जहां वे सब्जियों की खेती कर रही हैं। इसके अलावा उनके पास नौ दुधारू पशु हैं, जिनसे पशुपालन के जरिए भी परिवार की आमदनी होती है। उन्होंने खेत में आम, कटहल और सीताफल के पेड़ भी लगाए हैं। इस तरह वे पारंपरिक खेती के साथ सब्जी उत्पादन, मछली पालन, पशुपालन और बागवानी जैसी गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं। अलग-अलग गतिविधियों को अपनाने से परिवार के पास आमदनी के कई स्रोत बने हैं।
जानकी बाई के अनुसार, वर्ष 2020 से पहले उन्हें खेती से सालभर में मुश्किल से एक लाख रुपये तक की आमदनी हो पाती थी। उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने और खेती के साथ अन्य गतिविधियां शुरू करने के बाद अब उनकी सालाना आय लगभग 4 से 5 लाख रुपये तक हो गई है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और जीवन स्तर में भी सुधार आया है। जानकी बाई का कहना है कि पारंपरिक तरीके से हटकर उन्नत तकनीकों से खेती करना फायदेमंद है। उन्होंने इस बदलाव के लिए सरकार और कृषि विभाग के अधिकारियों का आभार जताया। उनके खेत का जिला कृषि अधिकारी और आत्मा परियोजना के संचालक द्वारा भ्रमण भी किया गया है।