एग्रीवेट: Makhana Export: बिहार का मशहूर मिथिला मखाना अब देश की सीमाओं से निकलकर यूरोप के बाजार तक पहुंच गया है. कृषि भवन, मीठापुर से कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभागीय अधिकारियों के साथ वर्चुअली जुड़कर पूर्णिया से ग्रीस के लिए मिथिला मखाना की पहली वाणिज्यिक खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. APEDA के सहयोग से भेजी गई इस खेप को बिहार के किसानों की मेहनत, मिथिला की पहचान और राज्य के कृषि उत्पादों की बढ़ती वैश्विक पहुंच से जोड़कर देखा जा रहा है. मखाने के बढ़ते निर्यात और मूल्यवर्धन से किसानों को सामान्य बाजार मूल्य की तुलना में करीब 18 फीसदी तक मुनाफा मिल रहा है.
पूर्णिया से ग्रीस के लिए मखाने की पहली वाणिज्यिक खेप भेजी गई है. कृषि विभाग और APEDA के सहयोग से हुई इस पहल से बिहार के मखाना उत्पादकों को विदेशी बाजार तक पहुंच बनाने का रास्ता मिला है. मखाना राज्य के प्रमुख कृषि उत्पादों में शामिल है और लंबे समय से यहां के किसान इसकी खेती करते आ रहे हैं. मखाने की विदेशों में मांग बढ़ने से किसानों, उत्पादकों, प्रसंस्करण इकाइयों और कारोबारियों के लिए बाजार का दायरा बढ़ सकता है. इससे बिहार के पारंपरिक उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की संभावना भी बढ़ी है.
जीआई टैग के बाद बढ़ा निर्यात, किसानों को बेहतर दाम मिलने उम्मीद.
बिहार में मखाना की खेती मुख्य रूप से मिथिलांचल, कोसी और सीमांचल क्षेत्रों में होती है. अब इसका दायरा बढ़कर राज्य के 21 से अधिक जिलों तक पहुंच चुका है. दरभंगा, मधुबनी, सहरसा, पूर्णिया, कटिहार, सुपौल, अररिया और किशनगंज प्रमुख मखाना उत्पादक जिलों में शामिल हैं. मधुबनी को मखाना का उद्गम स्थल भी माना जाता है. वहीं पूर्णिया और सीमांचल के दूसरे इलाकों में भी बड़े स्तर पर इसकी खेती होती है. तालाबों और जलभराव वाले क्षेत्रों में होने वाली मखाने की खेती के बाद इसकी सफाई, प्रसंस्करण और पैकेजिंग की प्रक्रिया होती है.
बिहार के मिथिला मखाना को जीआई टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और बाजार की संभावनाएं बढ़ी हैं. निर्यात बढ़ने के साथ किसानों को अपनी उपज के बेहतर दाम मिलने की संभावना बनी है. सीधे किसानों से मखाने की खरीद होने और बिचौलियों की भूमिका कम होने से दरभंगा, पूर्णिया और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को लाभ मिलने की बात कही गई है. APEDA के सहयोग से बिहार से 18 मीट्रिक टन मखाने की पहली समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भी भेजी जा चुकी है. इसके अलावा कनाडा और ग्रीस के लिए भी मखाने की खेप रवाना हुई है. निर्यात और मूल्यवर्धन से किसानों को सामान्य बाजार मूल्य के मुकाबले करीब 18 फीसदी तक अधिक मुनाफा मिलने की बात कही गई है.