UP News: एक साहीवाल गाय से जन्मीं 5 बछियां, इस तकनीक से सिर्फ मादा ही पैदा होगी – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: Sahiwal Cow: उत्तर प्रदेश में उन्नत पशु प्रजनन तकनीक की मदद से साहीवाल नस्ल की संतति बढ़ाने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है. बरकछा स्थित राजीव गांधी दक्षिणी परिसर के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान संकाय में एक साहीवाल गाय से एक साल के भीतर पांच स्वस्थ बछियों का जन्म कराया गया है. इस उपलब्धि में मल्टीपल ओव्यूलेशन एंड एम्ब्रियो ट्रांसफर (MOET) तकनीक का इस्तेमाल किया गया. उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, पशुओं की उन्नत नस्लों को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक प्रजनन तकनीकों का उपयोग महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. इस परियोजना में सेक्स-सॉर्टेड सीमेन के इस्तेमाल से सभी पांच संततियां मादा पैदा हुईं. इससे डेयरी क्षेत्र में अच्छी आनुवंशिक क्षमता वाली गायों की संख्या बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं.

इस परियोजना के लिए शुद्ध नस्ल की साहीवाल गाय  संख्या 53 को भ्रूण दाता के रूप में चुना गया था. इस गाय का अधिकतम दैनिक दुग्ध उत्पादन 11.5 किलोग्राम बताया गया है. गाय का कृत्रिम गर्भाधान सेक्स-सॉर्टेड सीमेन की मदद से किया गया. इसके बाद दाता गाय से प्रत्यारोपण के योग्य 15 भ्रूण प्राप्त हुए. इन भ्रूणों को दूसरी गायों में प्रत्यारोपित किया गया, जिन्हें सरोगेट गाय कहा जाता है. भ्रूण प्रत्यारोपण के बाद पांच सरोगेट गायें गर्भवती हुईं और उन्होंने पांच स्वस्थ बछियों को जन्म दिया. परियोजना से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, सभी बछियां स्वस्थ हैं. यह उपलब्धि एक ही श्रेष्ठ नस्ल की गाय से कम समय में कई संततियां प्राप्त करने की संभावनाओं को दिखाती है.

मल्टीपल ओव्यूलेशन एंड एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक  को संक्षेप में MOET कहा जाता है. इसमें हार्मोन की मदद से दाता गाय में एक से अधिक अंडाणु विकसित किए जाते हैं. इसके बाद कृत्रिम गर्भाधान कराया जाता है, जिससे कई भ्रूण विकसित हो सकते हैं. निर्धारित समय पर इन भ्रूणों को निकालकर दूसरी गायों के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है. इन दूसरी गायों को सरोगेट गाय कहा जाता है. इस प्रक्रिया से एक ही गाय की आनुवंशिक क्षमता को कई संततियों तक पहुंचाने में मदद मिलती है. हालांकि, प्राप्त भ्रूणों की संख्या और उनसे जन्म लेने वाली संततियों की संख्या अलग-अलग हो सकती है. सफलता कई जैविक और प्रबंधन संबंधी परिस्थितियों पर निर्भर करती है.

परियोजना से जुड़ी जानकारी के अनुसार, पारंपरिक कृत्रिम गर्भाधान  के जरिए एक गाय से पांच बछियां प्राप्त करने के लिए कई बार गर्भधारण की प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है. इसमें लगभग 6 से 6.5 वर्ष तक लग सकते हैं. इसके मुकाबले भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक से एक ही दाता गाय के कई भ्रूण अलग-अलग गायों में प्रत्यारोपित किए जा सकते हैं. इससे श्रेष्ठ आनुवंशिक गुणों वाली संतति प्राप्त करने की प्रक्रिया तेज हो सकती है. खासकर उन पशुपालकों और डेयरी संस्थानों के लिए यह तकनीक उपयोगी हो सकती है, जो अधिक दूध देने वाली और अच्छी नस्ल की गायों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं. हालांकि, वास्तविक परिणाम तकनीक की लागत, उपलब्ध सुविधाओं और गर्भधारण की सफलता पर निर्भर करेंगे.

इस परियोजना में सेक्स-सॉर्टेड सीमेन  का इस्तेमाल किया गया, जिसका उद्देश्य मादा संतति प्राप्त करने की संभावना बढ़ाना है. इसी वजह से जन्मी सभी पांच संततियां बछियां हैं. डेयरी व्यवसाय में मादा बछियों का विशेष महत्व होता है, क्योंकि वे बड़ी होने के बाद दूध उत्पादन का आधार बन सकती हैं. यदि इन बछियों में अच्छी आनुवंशिक क्षमता और बेहतर स्वास्थ्य बना रहता है, तो भविष्य में इनका इस्तेमाल उन्नत नस्ल की डेयरी गायों की संख्या बढ़ाने में किया जा सकता है. भ्रूण प्रत्यारोपण और सेक्स-सॉर्टेड सीमेन जैसी तकनीकें पशुपालन में नस्ल सुधार के नए अवसर खोलती हैं. हालांकि, इनके व्यापक इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों, उचित पशु चिकित्सा सुविधाओं और पशुपालकों तक तकनीक की पहुंच बढ़ाना जरूरी होगा.

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