भारत-न्यूजीलैंड FTA: इन कृषि उत्पादों के निर्यात को मिलेगा बढ़ावा, किसानों और व्यापारियों के लिए खुले नए अवसर – एग्रीवेट

Team Agrivate
9 Min Read

एग्रीवेट: भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर से लागू हो गया है. इस समझौते से भारतीय कृषि उत्पादों, फल-सब्जियों, प्रोसेस्‍ड फूड प्रोडक्‍ट्स, मसालों, चाय और कॉफी के निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में बड़ा अवसर मिलेगा. न्यूजीलैंड ने भारत से निर्यात होने वाली सभी वस्तुओं को 100 फीसदी शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच देने पर सहमति जताई है. इससे भारतीय उत्पादों पर लगने वाला आयात शुल्क समाप्त हो जाएगा और निर्यातकों को वहां प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी.

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, समझौते के तहत फल-सब्जियां, अनाज, कॉफी, चाय, कोको, मसाले और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा. इसके अलावा कपड़ा, परिधान, चमड़ा, फुटवियर, दवा, इंजीनियरिंग सामान, समुद्री उत्पाद, प्लास्टिक और रबर से जुड़े उत्पादों के निर्यातकों को भी फायदा होगा.

इस समझौते के लागू होने से पहले न्यूजीलैंड में भारतीय वस्तुओं पर 10 फीसदी तक आयात शुल्क लगता था. शुल्क समाप्त होने से भारतीय निर्यातकों की लागत संबंधी प्रतिस्पर्धा बेहतर हो सकती है. यह भारत का पहला ऐसा मुक्त व्यापार समझौता है, जिसमें लागू होने के साथ ही सभी टैरिफ श्रेणियों में पूर्ण शुल्क-मुक्त पहुंच मिली है.

भारत ने समझौते में उन उत्पादों को छूट सूची में रखा है, जिनके आयात से घरेलू किसानों और संबंधित उद्योगों पर असर पड़ सकता है. इनमें दूध, क्रीम, मट्ठा, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद शामिल हैं. इसके अलावा प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम, चीनी और कई वनस्पति और सूक्ष्मजीवी वसा और तेलों को भी इस सूची में रखा गया है.

समझौते के तहत भारत ने अपने कुल टैरिफ लाइन का करीब 70 फीसदी हिस्सा न्यूजीलैंड के लिए रियायतों के दायरे में रखा है. यह भारत-न्यूजीलैंड के मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार मूल्य के लगभग 95 फीसदी हिस्से को कवर करता है. बाकी 29.97 फीसदी टैरिफ लाइनों को रियायतों से बाहर रखा गया है.

भारत ने सेब, कीवी, मनुका शहद और एल्ब्यूमिन के लिए शुल्क-आधारित कोटा तय किया है. साथ ही, न्यूनतम आयात मूल्य और अन्य सुरक्षा उपायों का प्रावधान किया गया है. इसका उद्देश्य न्यूजीलैंड के उत्पादों को भारतीय बाजार में प्रवेश देने के साथ घरेलू किसानों के हितों की रक्षा करना है.

समझौते में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए दोनों देशों के बीच साझेदारी भी बनाई गई है. इसके तहत कीवी फल, सेब और शहद के लिए अलग-अलग कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी. इनका उद्देश्य भारत में इन उत्पादों की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार के लिए सहयोग बढ़ाना है.

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार मौजूदा करीब 2.4 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक लगभग 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर यानी करीब 35,000 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य है.

गोयल ने इस मौके पर जेसीबी इंडिया की छोटी खुदाई मशीन का निर्यात भी शुरू कराया. यह मशीन व्यापार समझौते के तहत न्यूजीलैंड भेजी जाएगी. उन्होंने कहा कि कंपनी अपने कुल उत्पादन का 25 फीसदी भारत से दूसरे देशों में निर्यात करती है. उन्होंने इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 फीसदी करने का लक्ष्य दिया. न्यूजीलैंड जेसीबी इंडिया का 140वां निर्यात गंतव्य बना है.

न्यूजीलैंड ने भारतीय सेवा प्रदाताओं के लिए 118 सेवा क्षेत्रों या उप-क्षेत्रों को खोलने पर सहमति दी है. इनमें सूचना प्रौद्योगिकी, पेशेवर सेवाएं, दूरसंचार, निर्माण, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं और पर्यटन शामिल हैं. इससे भारतीय कंपनियों और पेशेवरों को न्यूजीलैंड में सेवाएं देने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं.

समझौते में भारतीय पेशेवरों और कारोबारियों के अस्थायी प्रवेश के लिए भी प्रावधान हैं. एक ही कंपनी के भीतर स्थानांतरित होने वाले कर्मचारी तीन साल तक रह सकेंगे. कारोबारी आगंतुकों और उपकरणों की स्थापना या मरम्मत करने वाले कर्मचारियों को 12 महीने की अवधि में 90 दिनों तक रहने की अनुमति होगी. अनुबंध के तहत सेवाएं देने वाले और स्वतंत्र पेशेवर 12 महीने तक रह सकेंगे.

इसके अलावा, कुशल भारतीयों के लिए अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा की नई व्यवस्था बनाई गई है. इसके तहत एक समय में अधिकतम 5,000 वीजा की सीमा होगी और प्रवास की अवधि तीन साल तक हो सकेगी. इसमें आईटी, इंजीनियरिंग, निर्माण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के पेशेवरों के साथ योग प्रशिक्षक, शेफ, संगीत शिक्षक और आयुष चिकित्सक जैसे पेशे भी शामिल हैं.

मुक्त व्यापार समझौते से अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड से भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया है. समझौते से वस्तुओं के व्यापार के साथ सेवाओं, पेशेवरों, विद्यार्थियों और कृषि सहयोग के क्षेत्र में भी अवसर बढ़ने की उम्मीद है.

न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने कहा कि समझौते के पूरी तरह लागू होने पर न्यूजीलैंड के भारत को होने वाले मौजूदा निर्यात के 95 फीसदी हिस्से को शुल्क समाप्त होने या उसमें पर्याप्त कटौती का लाभ मिलेगा. इससे न्यूजीलैंड के विभिन्न क्षेत्रों के निर्यातकों के लिए नए अवसर बनेंगे.

कार्गो और खराब होने वाले सामान की निकासी के लिए समयसीमा. समझौते में कार्गो के लिए 48 घंटे के भीतर और एक्सप्रेस तथा जल्दी खराब होने वाले सामान के लिए 24 घंटे के भीतर कस्टम क्लीयरेंस का प्रावधान है.

डिजिटल प्रमाणन और पात्र निर्यातकों के लिए मूल देश से संबंधित नियमों के स्व-प्रमाणन की व्यवस्था से कागजी कार्रवाई, प्रक्रियागत देरी और अनुपालन लागत घटाने में मदद मिल सकती है.

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि अब चुनौती समझौते में मौजूद अवसरों को वास्तविक लाभ में बदलने की है. उन्होंने कहा कि यह देखना होगा कि मुक्त व्यापार समझौते के प्रावधानों का इस्तेमाल करके लोगों को ठोस लाभ कैसे पहुंचाया जा सकता है. (पीटीआई)

Share This Article