एग्रीवेट: गन्ना की कुछ पुरानी किस्मों को वर्तमान समय में अनुपयुक्त मान लिया गया है. उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर (UPCSR) ने कोयंबटूर से प्रजनन बीज को अपने केंद्र में विकसित किया था, इन 6 गन्ना किस्मों को अब अनुपयुक्त घोषित किया गया है. कहा गया है कि वर्तमान समय के हिसाब से उन्नत किस्मों के आगे यह किस्में अब कमजोर पड़ गई हैं. उत्पादन और चीनी रिकवरी कमजोर हुई है. जबकि, नई उन्नत किस्मों को बढ़ावा देना भी एक बड़ी वजह है.
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर (UPCSR) ने कुछ पुरानी और कम लोकप्रिय किस्मों को खेती के लिए अनुपयुक्त घोषित किया गया है. अनुपयुक्त घोषित की गई किस्मों को कोयंबटूर से प्रजनन बीज लेकर शाहजहांपुर केंद्र में विकसित किया था. अनुपयुक्त घोषित किस्मों में COSH-95255, CO-SH-97264, CO-SH-96275, CO-SH-97261, CO-SH-96436 और CO-SH-98231 शामिल हैं. इनकी बुवाई धीरे-धीरे रोकी जाएगी. वहीं, किसान इन किस्मों की जगह उन्नत किस्मों की बुवाई कर रहे हैं.
गन्ना विभाग के अनुसार अनुपयुक्त घोषित की गई गन्ना किस्मों की जगह अधिक पैदावार और बेहतर चीनी परता देने वाली नई उन्नत गन्ना किस्मों को बढ़ावा देना है, ताकि किसानों की उत्पादकता और आमदनी बढ़ सके तथा चीनी मिलों को भी बेहतर रिकवरी का लाभ मिले. हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में इन छह किस्मों को हटाने के लिए किसी एक खास बीमारी या कमी को अलग-अलग कारण नहीं बताया गया है. गन्ना शोध परिषद ने कहा है कि इन किस्मों को अगले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाएगा.
उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए सरकार ने 12 नई किस्मों की खेती करने को मंजूरी दे दी है. 4 किस्में गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर में विकसित की गई हैं और 8 किस्में केंद्र की ओर से स्वीकृत की गई हैं, जिन्हें यूपी में खेती के लिए योग्य माना गया है. यह किस्में लाल सड़न रोग से बचने में सक्षम हैं और पूर्व की उन्नत किस्मों से ज्यादा उत्पादन देती हैं. नई किस्मों में शर्करा रिकवरी भी ज्यादा पाई गई है.