एग्रीवेट: उत्तर प्रदेश के 11 प्रमुख चीनी उत्पादक जिलों में इस साल गन्ने का रकबा 1.6 फीसदी घट गया है. इन जिलों में राज्य की 20 बड़ी चीनी मिलें हैं, जिनकी कुल चीनी उत्पादन में करीब 68 फीसदी हिस्सेदारी है. एक्सपर्ट के मुताबिक, मिलों में जल्द पेराई शुरू होने और स्थानीय कोल्हुओं की गन्ने की खरीद बढ़ने से मिलों को गन्ने की कमी का सामना करना पड़ सकता है. इससे राज्य के कुल चीनी उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है. हालांकि, मौजूदा सीजन में यूपी में 89.52 लाख टन चीनी उत्पादन हुआ है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की 20 चीनी मिलों ने 32.11 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है. इनमें राज्य की तीन प्रमुख मिलें भी शामिल हैं. त्रिवेणी इंजीनियरिंग और डीसीएम श्रीराम की खतौली, अजापुर और दौराला मिलों का भी इसमें योगदान रहा है. इन 20 चीनी मिलों की स्थिति को देखते हुए राज्य के 11 जिले आगामी सीजन में चीनी उत्पादन के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं. इन जिलों में गन्ने की उपलब्धता का सीधा असर मिलों की पेराई और चीनी उत्पादन पर पड़ सकता है. गन्ना विशेषज्ञ डीके त्यागी ने बिजनेसलाइन से कहा कि सरकार चीनी मिलों को जल्द पेराई शुरू करने पर जोर दे रही है. अगर मिलों में पेराई जल्दी शुरू होती है तो गन्ने से चीनी की रिकवरी कम हो सकती है और उत्पादन प्रभावित हो सकता है. हालांकि, मिलों के जल्द शुरू होने का फैसला उस समय चीनी की कीमतों पर निर्भर करेगा. विशेषज्ञों के मुताबिक, चीनी मिलों में जल्द पेराई शुरू करने के फायदे और नुकसान दोनों हैं. इससे अक्टूबर-नवंबर में घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ सकती है. हालांकि, पूरे सीजन में कम गन्ना रकबा और कम रिकवरी जैसे कारणों से कुल चीनी उत्पादन प्रभावित हो सकता है. उत्तर प्रदेश में 2025-26 सीजन में गन्ने से चीनी की औसत रिकवरी 10.19 फीसदी रही. वहीं, राज्य की 20 प्रमुख मिलों में यह रिकवरी 10.4 फीसदी रही. त्रिवेणी की सबितगढ़ मिल में सबसे ज्यादा 11.51 फीसदी रिकवरी दर्ज की गई. इसके बाद मंसूरपुर मिल में 11.25 फीसदी और बजाज हिंदुस्तान की किनौनी मिल में 11.22 फीसदी रिकवरी रही. गन्ना विशेषज्ञ डीके त्यागी कहा कि सरकार को जल्द पेराई शुरू कराने के बजाय कम रिकवरी वाली मिलों में उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए. उनके मुताबिक, 24 मिलों में रिकवरी 9.5 फीसदी से कम है. वहीं, सबसे ज्यादा 11.64 फीसदी रिकवरी वाली मिल टॉप-20 मिलों की सूची में शामिल नहीं है. इससे कम रिकवरी वाली मिलों में सुधार कर उत्पादन बढ़ाने की संभावना दिखती है. उत्तर प्रदेश में अक्टूबर से शुरू होने वाले नए पेराई सीजन में चीनी मिलों को स्थानीय गुड़ बनाने वाली इकाइयों (कोल्हू) से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल सकती है. उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल गुड़ की खुदरा कीमत 100 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गई थी और अब भी यूपी में करीब 90 रुपये किलो है. ऐसे में कोल्हू किसानों से गन्ना खरीदने के लिए सरकार की तय दर से ज्यादा कीमत दे सकते हैं.