RFOI – First Runner-Up: सफल किसान लेखराम यादव को MFOI Awards 2025 में मिला RFOI-फर्स्ट रनर-अप अवार्ड, अजय मिश्र टेनी ने किया सम्मानित – एग्रीवेट

atulpradhan
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MFOI Awards 2025 में सफल किसान लेखराम यादव को RFOI – First Runner-Up से सम्मानित किया गया. उन्होंने 1150 एकड़ में जैविक खेती, TCBT तकनीक और एग्रो-टूरिज्म के माध्यम से किसानों को सशक्त किया है. उनकी कृषि में विज्ञान, परंपरा और आध्यात्म का अनूठा संगम उन्हें अग्रणी एग्रीप्रेन्योर बनाता है.

RFOI – First Runner-Up: सफल किसान लेखराम यादव आज भारत के उन चुनिंदा अग्रणी किसानों और एग्रीप्रेन्योर्स में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी दूरदृष्टि, मेहनत और प्रकृति-समर्पित सोच के बल पर जैविक खेती का एक नया मॉडल खड़ा किया है. बायोटेक्नोलॉजी में एमएससी करने के बाद उन्होंने 6.5 वर्ष तक गुरुग्राम के NABL मान्यता प्राप्त लैब में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग और GMO टेस्टिंग जैसे सटीक वैज्ञानिक कार्यों में योगदान दिया. लेकिन शहरी जीवन के बदलते स्वास्थ्य पैटर्न और प्रकृति से टूटते संबंधों ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया. इसी आह्वान ने उन्हें प्रयोगशाला की सीमाओं से बाहर निकलकर धरती माता की सेवा करने की राह पर ला खड़ा किया.आज राजस्थान व गुजरात में 1150 एकड़ में जैविक खेती कर, वे खेती को वैज्ञानिक दृष्टि, आध्यात्मिक चेतना और पारंपरिक ज्ञान का अद्भुत संगम बना रहे हैं. इन्हीं उपलब्धियों को ध्यान में रखते हुए कृषि जागरण द्वारा आयोजित MFOI Awards 2025 में उन्हें RFOI – First Runner-Up से सम्मानित किया गया.

यह सम्मान भारत सरकार के पूर्व सांसद और पूर्व गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी द्वारा प्रदान किया गया. इस दौरान मंच पर कृषि जागरण के संस्थापक एवं एडिटर-इन-चीफ एम.सी. डोमिनिक और कृषि जागरण की मैनेजिंग डायरेक्टर शाइनी डोमिनिक भी उपस्थित रहीं. ऐसे में आइए सफल किसान लेखराम यादव की सफलता की कहानी के बारे में विस्तार से जानते हैं-

लेखराम यादव का सफर विज्ञान से शुरू होता है. एमएससी बायोटेक्नोलॉजी की डिग्री ने उन्हें लैबोरेटरी विज्ञान की मजबूत नींव दी. NABL मान्यता प्राप्त लैब में तकनीकी प्रबंधक के रूप में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही, जहां वे डीएनए फिंगरप्रिंटिंग और GMO टेस्टिंग जैसे विशेषज्ञ कार्यों से जुड़े थे. इसी अनुभव ने उन्हें वैज्ञानिक सोच, प्रिसिजन वर्क और गुणवत्ता की महत्ता सिखाई, जो आगे चलकर उनकी जैविक खेती की असली पूंजी बनी.

शहरी जीवन में बढ़ती बीमारियों, प्रदूषण और रासायनिक खाद्य पदार्थों के दुष्प्रभावों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया. उन्हें महसूस हुआ कि विज्ञान का वास्तविक उपयोग मानवता के कल्याण में होना चाहिए. इसी सोच ने उन्हें बड़ी नौकरी छोड़कर जैविक खेती की ओर मोड़ा. राजस्थान में 110 एकड़ भूमि से शुरू हुआ यह सफर आज 1150 एकड़ पर विस्तृत है.

राजस्थान और गुजरात में 1150 एकड़ का जैविक साम्राज्य

आज उनके फार्म देश के निम्न जिलों में फैले हुए हैं-

कठिनाइयों से सीख-असफलता से उभरती नई शुरुआत

जैविक खेती का आरंभ आसान नहीं था. एलोवेरा की पहली फसल में उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि असफलता को सीख में बदल दिया. वे देशभर में सेमिनारों में गए, अनुभवी किसानों से मार्गदर्शन लिया, और डिजिटल प्लेटफॉर्म से आधुनिक ज्ञान जुटाया.

TCBT तकनीक से खेती में क्रांतिकारी बदलाव

गुरुजी ताराचंद बेलजी द्वारा सुझाई गई TCBT तकनीक ने उनके फार्म में अद्भुत सुधार लाए.आज उनके सभी खेतों में यह तकनीक लागू है, जिसके परिणामस्वरूप-

उनका फार्म “सुगंधिम पुष्टि वर्धनम्” सिद्धांत पर चलता है, जिसमें फसलों की खुशबू, पोषण और प्राकृतिक शक्ति को संरक्षित रखा जाता है.

लेखराम यादव अपने खेतों में प्रतिदिन दो बार अग्निहोत्र करते हैं. इसका उद्देश्य-

मिट्टी और पर्यावरण में सकारात्मक तरंगें बढ़ाना

यह अनूठा मिश्रण खेती को आध्यात्मिक और पर्यावरणीय दोनों स्तरों पर मजबूत बनाता है.

उनके फार्म में सहिवाल नस्ल की गायों से प्राप्त A2 गुणवत्ता वाला दूध और उससे बने उत्पाद देशभर में लोकप्रिय हैं-

पारंपरिक प्रसंस्करण – पोषण को शुद्ध रूप में सुरक्षित रखना

उनका मानना है कि “उगाओ पारंपरिक, प्रसंस्करण पारंपरिक, खाओ पारंपरिक”, इसी सोच से उन्होंने अपने फार्म पर कई परंपरागत तकनीकों को पुनर्जीवित किया-

ओखली-मूसल में मसाला पिसाई – प्राकृतिक सुगंध और औषधीय गुण बरकरार रहते हैं

उनकी मेहनत और समर्पण को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है—

RFOI – First Runner-Up (MFOI Awards 2025) – भारत सरकार के पूर्व सांसद और पूर्व गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी द्वारा सम्मानित

ये सम्मान सिर्फ उनकी उपलब्धियों के प्रतीक नहीं, बल्कि जैविक खेती के प्रति उनके अटूट समर्पण का प्रमाण हैं.

लेखराम यादव कहते हैं, “प्रकृति कोई संसाधन नहीं, एक पवित्र संबंध है. जैविक खेती इस संबंध को पुनर्स्थापित करने का माध्यम है. जब हम जमीन को पोषित करते हैं, जमीन हमें जीवन पोषित करती है.”

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