एग्रीवेट: 10 अक्टूबर 2026, रांची: झारखंड में रबी फसलों का ₹1 में बीमा, पहले से तय समय से पहले शुरू हुआ पंजीयन – झारखंड में रबी सीजन की फसलों के लिए बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीयन शुरू हो गया है। खास बात यह है कि इस बार रजिस्ट्रेशन नवंबर के बजाय 1 अक्टूबर से ही शुरू कर दिया गया, जबकि पहले यह काम आमतौर पर नवंबर में शुरू होता था।
योजना के तहत गेहूं, चना, राई-सरसों और आलू की फसलें बीमा के दायरे में शामिल की गई हैं। किसानों को इसके लिए सिर्फ ₹1 प्रीमियम देना होगा, बाकी प्रीमियम राशि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर चुकाती हैं। यह व्यवस्था झारखंड सरकार ने बिरसा मुंडा के नाम पर शुरू की थी, ताकि छोटे व सीमांत किसान भी बिना बोझ के अपनी फसल का बीमा करा सकें।
सहकारी समितियों के निबंधक शशि रंजन के मुताबिक रबी सीजन के लिए पंजीयन की प्रक्रिया को इस बार जल्दी शुरू किया गया है, ताकि अधिक से अधिक किसान समय पर अपनी फसल का बीमा करा सकें। खरीफ सीजन में भी बड़ी संख्या में किसानों ने इस योजना के तहत बीमा कराया था।
कृषि विभाग के सचिव के मुताबिक डिजिटल क्रॉप सर्वे की अंतिम तिथि भी 15 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है, जिससे बीमा के लिए जरूरी फसल आंकड़े सही तरीके से दर्ज किए जा सकें। जमताड़ा, गढ़वा और अन्य जिलों में फसल बीमा के प्रचार के लिए जागरूकता रथ भी गांव-गांव भेजे जा रहे हैं, ताकि किसानों को योजना की जानकारी मिल सके और वे पंजीयन की अंतिम तारीख से पहले आवेदन कर सकें।
बीमा योजना के तहत बेमौसम बारिश, सूखा, पाला, बाढ़ या कीट-रोग के भारी प्रकोप से फसल को नुकसान होने पर किसानों को तय प्रक्रिया के अनुसार मुआवजा दिया जाता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने नजदीकी सहकारी समिति, बैंक शाखा या सामान्य सेवा केंद्र के माध्यम से जल्द से जल्द पंजीयन करा लें, क्योंकि फसल बोने के बाद एक तय अवधि के भीतर ही आवेदन स्वीकार किए जाते हैं। जो किसान बैंक से कर्ज नहीं लेते, उन्हें भी इस योजना में स्वेच्छा से शामिल होने की छूट है।
झारखंड में ज्यादातर किसान छोटी और सीमांत जोत पर खेती करते हैं, इसलिए राज्य सरकार ने प्रीमियम का बोझ लगभग पूरी तरह खुद उठाने का फैसला किया है। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ सीजन में राज्य में असामान्य बारिश और सूखे की वजह से फसल को नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद किसानों में बीमा के प्रति जागरूकता बढ़ी है। विभाग का मानना है कि पंजीयन जल्दी शुरू होने से डिजिटल क्रॉप सर्वे का काम भी समय पर पूरा हो सकेगा, जिससे नुकसान का सही आकलन करने और समय पर मुआवजा देने में आसानी होगी।
इससे पहले खरीफ सीजन में भी इस योजना को लेकर राज्य के कई जिलों में जागरूकता रथ भेजे गए थे, जिनसे किसानों को ₹1 के प्रीमियम और बीमा के फायदों के बारे में बताया गया था। कृषि विभाग अब रबी सीजन के लिए भी इसी तरह गांव-गांव जाकर किसानों को योजना से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।