एग्रीवेट: बकरी पालन ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत में शुरू किया जा सकने वाला एक प्रमुख व्यवसाय है. दूध, मांस और बकरी-बकरों की बिक्री से किसानों और पशुपालकों को नियमित आमदनी का अवसर मिलता है. इसी को देखते हुए झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ‘मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना’ के तहत व्यावसायिक बकरी पालन योजना शुरू की है. इस योजना का उद्देश्य राज्य में स्वरोजगार और व्यावसायिक पशुपालन को बढ़ावा देना है. इस योजना के तहत पात्र पशुपालक 100 बकरी और 5 बकरा क्षमता वाले फार्म की स्थापना कर सकते हैं. सरकार की ओर से परियोजना लागत पर 70 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा. योजना के अनुसार, कुल परियोजना लागत 9 लाख 78 हजार रुपये निर्धारित है, जिसमें सरकार की ओर से 6 लाख 84 हजार 600 रुपये का अनुदान और लाभुक का अंशदान 2 लाख 93 हजार 400 रुपये होगा. पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, योजना में लाभुक को कुल परियोजना लागत का 30 प्रतिशत हिस्सा स्वयं वहन करना होगा. इस राशि में से 15 प्रतिशत तक बैंक ऋण के माध्यम से प्राप्त करने की सुविधा दी गई है. यानी पात्र लाभुक को अपनी ओर से परियोजना में निर्धारित अंशदान देना होगा और शेष राशि के लिए बैंक से वित्तीय सहायता ली जा सकती है. सरकार की ओर से मिलने वाला अनुदान सीधे शुरुआत में पूरी राशि के रूप में नहीं दिया जाएगा. इसके लिए योजना में निर्धारित चरणों और शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा. योजना के तहत अनुदान राशि का भुगतान दो किस्तों में किया जाएगा. पहली किस्त में कुल अनुदान का 40 प्रतिशत हिस्सा योजना स्वीकृत होने के बाद दिया जाएगा. इसके बाद जब फार्म के लिए जरूरी आधारभूत संरचना पूरी कर ली जाएगी, तब दूसरी किस्त के रूप में शेष 60 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा. योजना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि लाभुक के स्वयं के अंशदान और बैंक ऋण की राशि के हस्तांतरण के बाद ही सरकारी अनुदान जारी किया जाएगा. इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि फार्म की स्थापना के लिए जरूरी वित्तीय व्यवस्था पहले से उपलब्ध हो. इसके अलावा, फार्म में महामारी नियंत्रण यानी एपिडेमिक कंट्रोल से जुड़े मानकों की नियमित समीक्षा की जाएगी. जिला पशुपालन पदाधिकारी की ओर से फार्म का निरीक्षण किया जा सकता है और पशुओं के स्वास्थ्य तथा फार्म की व्यवस्थाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप रखना होगा. मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत व्यावसायिक बकरी पालन का लाभ लेने के लिए आवेदक का झारखंड का स्थायी निवासी होना जरूरी है. इसके साथ ही आवेदक के पास बकरी पालन का अनुभव होना चाहिए. योजना के तहत फार्म स्थापित करने के लिए कम से कम 50 डिसमिल निजी जमीन या 10 वर्षों की लीज पर जमीन होना आवश्यक है. संबंधित भूमि पर छायादार पेड़ों की उपलब्धता भी अनिवार्य बताई गई है. आवेदक को बैंक से संबंधित वित्तीय दस्तावेज भी उपलब्ध कराने होंगे. इसके लिए बैंक द्वारा जारी प्रमाण-पत्र या पिछले एक वर्ष के औसत बैंक बैलेंस का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा. यदि परियोजना के लिए बैंक ऋण लिया जा रहा है तो ऋण स्वीकृति सहमति पत्र भी देना होगा. बकरी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके आवेदकों को चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जाएगी. इसके अलावा, चयनित लाभुक को फार्म को कम से कम 10 वर्षों तक संचालित रखने का शपथ-पत्र भी देना होगा. इस योजना का लाभ केवल व्यक्तिगत पशुपालकों तक सीमित नहीं है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्वयं सहायता समूह (SHG) और किसान उत्पादक संगठन (FPO) भी योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं. इससे सामूहिक रूप से बकरी पालन करने वाले समूहों को भी व्यावसायिक स्तर पर फार्म स्थापित करने का अवसर मिल सकता है. इच्छुक आवेदकों को निर्धारित प्रपत्र में आवेदन पत्र, घोषणा पत्र और शपथ पत्र सहित आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे. आवेदन संबंधित प्रखंड पशुपालन कार्यालय या जिला पशुपालन कार्यालय में जमा किया जा सकता है. व्यावसायिक बकरी पालन योजना के तहत लाभुकों के चयन की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी. सबसे पहले इच्छुक आवेदक को आवश्यक दस्तावेजों के साथ योजना का प्रस्ताव पशुपालन कार्यालय में जमा करना होगा. इसके बाद संबंधित अधिकारियों की ओर से प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया जाएगा. स्थल और दस्तावेजों की जांच के बाद पात्र पाए जाने वाले आवेदकों की अनुशंसा पशुपालन निदेशक को भेजी जाएगी. अंतिम चरण में निदेशालय स्तर पर गठित समिति की ओर से आवेदकों का अंतिम चयन किया जाएगा. इस तरह केवल आवेदन करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि भूमि, बैंक दस्तावेज, फार्म की योजना और अन्य निर्धारित शर्तों को पूरा करना भी जरूरी होगा. झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के तहत राज्यभर में 437 व्यावसायिक बकरी फार्म स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. अलग-अलग जिलों के लिए फार्म की संख्या का अलग लक्ष्य रखा गया है. रांची में सबसे अधिक 47 फार्म स्थापित करने का लक्ष्य है. इसके बाद जमशेदपुर और पलामू में 26-26, हजारीबाग में 25, चाईबासा में 23, दुमका में 22 और गोड्डा में 20 फार्म का लक्ष्य रखा गया है. गढ़वा में 19, साहिबगंज और गुमला में 18-18 तथा गिरिडीह में 17 फार्म स्थापित किए जाने हैं. वहीं देवघर, धनबाद और बोकारो में 16-16, जबकि चतरा, पाकुड़ और सरायकेला में 15-15 फार्म स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. लोहरदगा में सबसे कम 9 फार्म स्थापित करने का लक्ष्य है. अन्य जिलों में भी उनकी निर्धारित संख्या के अनुसार लाभुकों का चयन किया जाएगा. कुल मिलाकर, 9.78 लाख रुपये की परियोजना लागत वाले 100 बकरी और 5 बकरा क्षमता के फार्म के लिए 6.84 लाख रुपये से अधिक का सरकारी अनुदान निर्धारित किया गया है. ऐसे में झारखंड के पात्र पशुपालकों, स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के लिए यह योजना व्यावसायिक बकरी पालन को संगठित रूप से शुरू करने का अवसर प्रदान करती है.