क्रॉपलाइफ इंडिया ने किसानों के लिए एआई आधारित सलाह टूल विकसित करने पर दिया जोर—पढ़ें इनसाइड स्टोरी – एग्रीवेट

atulpradhan
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एग्रीवेट: 18 सितंबर 2026, नई दिल्ली: क्रॉपलाइफ इंडिया ने किसानों के लिए एआई आधारित सलाह टूल विकसित करने पर दिया जोर – भारत में नकली कीटनाशकों की समस्या से निपटा जा सकता है, यदि नेशनल इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम (IPMS) को पूरी तरह लागू किया जाए। यह बात कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमेटी (CIB&RC) के सचिव डॉ. सुभाष चंद ने नई दिल्ली में क्रॉपलाइफ इंडिया के राष्ट्रीय सम्मेलन में कही।

डॉ. चंद 17 सितंबर को क्रॉपलाइफ इंडिया द्वारा आयोजित ‘एआई फॉर एग्रीकल्चर ट्रांसफॉर्मेशन’ सम्मेलन में बोल रहे थे। उन्होंने फसल सुरक्षा उद्योग से सामूहिक रूप से ऐसा एआई आधारित टूल या ऐप विकसित करने का भी आग्रह किया, जो किसानों को कीटों की पहचान करने और सही कीटनाशक, सही समय पर और सही मात्रा में इस्तेमाल करने के संबंध में निर्णय लेने में मदद कर सके।

डॉ. चंद के अनुसार, नेशनल IPMS डेटाबेस डीलर नेटवर्क के माध्यम से उत्पादों की ट्रैक एंड ट्रेस व्यवस्था उपलब्ध कराता है, जिससे उत्पाद की वास्तविकता की जांच की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस सिस्टम को पूरी तरह लागू करने से किसानों को बेचे जाने वाले नकली कीटनाशकों की समस्या से निपटने में मदद मिल सकती है।

क्रॉपलाइफ इंडिया ने YES BANK के साथ साझेदारी में सम्मेलन के दौरान ‘इनोवेशन इन क्रॉप प्रोटेक्शन सेक्टर’ नाम से एक रिपोर्ट भी जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, शहरी उपयोग के लिए कृषि भूमि के परिवर्तन के कारण वर्ष 2050 तक भारत का नेट बोया गया क्षेत्र 10% तक कम हो सकता है। रिपोर्ट का अनुमान है कि वर्तमान में भारत में कीटों और रोगों के कारण हर साल लगभग 2 लाख करोड़ रुपये मूल्य की फसल का नुकसान होता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ये दबाव और बढ़ सकते हैं। इसमें प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत बताई गई है, जिसमें कीटों और रोगों के कारण होने वाले फसल नुकसान को कम करना भी शामिल है। रिपोर्ट में क्षेत्र में कई सुधारों की जरूरत बताई गई है।

इनमें अधिक डिजिटलाइजेशन, किसानों के लिए बेहतर एक्सटेंशन सर्विसेज, और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाओं के माध्यम से घरेलू रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को बढ़ावा देना शामिल है। रिपोर्ट में वन नेशन, वन लाइसेंस व्यवस्था की भी सिफारिश की गई है, जिसके तहत पूरे देश में एक लाइसेंस मान्य हो।

इसके अलावा, भारत में नए फसल सुरक्षा उत्पादों के प्रवेश को प्रोत्साहित करने के लिए पांच साल के रेगुलेटरी डेटा प्रोटेक्शन (RDP) इंसेंटिव का सुझाव दिया गया है। सम्मेलन में आयोजित CEO पैनल में उद्योग जगत के नेताओं ने वर्ष 2035 तक एग्रोकेमिकल उद्योग के संभावित विकास और बदलावों पर चर्चा की।

क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर अग्रवाल ने कहा कि उद्योग में प्रत्येक मोड ऑफ एक्शन की खोज से आगे बढ़कर अधिक नजदीकी और उपयोग-केंद्रित इनोवेशन देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि भविष्य में रोबोटिक्स की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। रैलिस इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं CEO डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला ने कहा कि डिजिटल चैनल काफी महत्वपूर्ण हो जाएंगे और इनका मार्जिन पर प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि एआई उद्योग के विकास के अगले चरण को परिभाषित कर सकता है। बायर क्रॉपसाइंस के COO मोहन बाबू ने कहा कि उद्योग केवल केमिकल या बायोलॉजिकल समाधानों तक सीमित न रहकर एक इंटीग्रेटेड अप्रोच की ओर बढ़ेगा। इसमें एआई, बेहतर बीज और जीन एडिटिंग जैसी तकनीकें भी शामिल होंगी।

BASF एग्रीकल्चरल सॉल्यूशंस के बिजनेस डायरेक्टर गिरिधर रानुवा ने कृषि पर जलवायु परिवर्तन की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आउटकम-बेस्ड एग्रीकल्चर का महत्व बढ़ेगा। धनुका एग्रीटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल धनुका ने कहा कि भारत में विकसित किए जा रहे समाधान, जिनमें एआई आधारित एप्लीकेशन भी शामिल हैं, मैकेनाइजेशन को किसानों तक अधिक व्यापक रूप से पहुंचाने में मदद कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया के अन्य देश भारत के अनुभवों से सीख सकते हैं। आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

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