पारंपरिक खेती छोड़ अपनाया जैविक खाद निर्माण: सागर के युवा किसान लक्ष्य चौहान मात्र 3-4 महीने में तैयार कर रहे 10 टन वर्मी कंपोस्ट – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: KRISHAK JAGAT | National Agriculture Hindi Newspaper

09 अक्टूबर 2026, भोपाल: पारंपरिक खेती छोड़ अपनाया जैविक खाद निर्माण: सागर के युवा किसान लक्ष्य चौहान मात्र 3-4 महीने में तैयार कर रहे 10 टन वर्मी कंपोस्ट – मध्य प्रदेश के सागर जिले के खुरई विकासखंड के ग्राम समरेसी निवासी युवा किसान लक्ष्य चौहान ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर जैविक खाद उत्पादन को अपनी आजीविका का नया माध्यम बनाया है। उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और शासकीय योजना के सहयोग से उन्होंने वर्मी कंपोस्ट उत्पादन शुरू किया। अब वे मात्र 3 से 4 महीने में लगभग 10 टन उच्च गुणवत्ता वाली वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार कर रहे हैं। उनके उत्पाद की मांग मध्य प्रदेश के साथ-साथ गुजरात में भी है।

सरकारी योजना की मदद से शुरू किया खाद उत्पादन

लक्ष्य चौहान ने उद्यानिकी विभाग की योजनाओं की जानकारी लेकर विभाग से उपलब्ध कराए गए एचडीपीई वर्मीबेड की सहायता से वर्मी कंपोस्ट उत्पादन की शुरुआत की। इस दौरान उद्यानिकी विभाग के अधिकारी आर.एस. कुर्मी ने उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन दिया। वैज्ञानिक तकनीकों और निरंतर मार्गदर्शन की मदद से लक्ष्य ने जैविक खाद उत्पादन को व्यवस्थित रूप दिया। वे केंचुओं के उचित रखरखाव, नमी प्रबंधन, बेड में तापमान संतुलित रखने और गुणवत्तापूर्ण खाद तैयार करने की तकनीकों का पालन करते हैं।

3 से 4 महीने में तैयार करते हैं 10 टन खाद

लक्ष्य चौहान के अनुसार, वर्मी कंपोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया में उचित नमी, तापमान और केंचुओं की देखभाल का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। इन तकनीकों का पालन करते हुए वे 3 से 4 महीने में करीब 10 टन वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन कर रहे हैं। इस तरह उन्होंने खेती से जुड़े एक वैकल्पिक काम को आजीविका का माध्यम बनाया है। जैविक खाद उत्पादन के जरिए वे स्थानीय स्तर पर जैविक खेती करने वाले किसानों की जरूरतें पूरी कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश से गुजरात तक पहुंच रही खाद

लक्ष्य चौहान अपनी उत्पादित वर्मी कंपोस्ट खाद की आपूर्ति स्थानीय जैविक खेती करने वाले किसानों को करते हैं। खाद की गुणवत्ता और उसमें मौजूद संतुलित पोषक तत्वों के कारण मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात में भी इसकी मांग के अनुसार आपूर्ति की जा रही है। इससे उनके लिए बाजार का विस्तार करने और जैविक खाद उत्पादन को व्यावसायिक रूप देने का अवसर बना है।

युवाओं के लिए स्वरोजगार की मिसाल

लक्ष्य चौहान की पहल बताती है कि कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक तकनीक, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का उपयोग करके स्वरोजगार के नए अवसर तलाशे जा सकते हैं। उनका प्रयास अन्य किसानों और युवाओं को भी वर्मी कंपोस्ट उत्पादन तथा जैविक खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है। सेवा संकल्प अभियान 2026 के तहत ‘कहानी सेवा की’ श्रृंखला में लक्ष्य चौहान की यह कहानी कृषि क्षेत्र में नवाचार और स्वरोजगार की संभावनाओं को सामने लाती है।

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