मंडियों में धान खरीद की रफ्तार धीमी, नमी पर फंसा पेंच.. किसानों ने की 17 फीसदी सीमा बढ़ाने की मांग – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: हरियाणा में धान खरीद की रफ्तार काफी धीमी गति से चल रही है. तय मात्रा से अधिक नमी होने पर किसानों से धान की खरीद नहीं  की जा रही है. ऐसे में किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. किसान जगह-जगह मंडी के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी बीच भारतीय किसान यूनियन मान गुट के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर गुणी प्रकाश ने धान में नमी की तय सीमा बढ़ाने की मांग की मांग की है. उन्होंने कहा है कि मौजूदा 17 फीसदी नमी की सीमा कई बार किसानों के लिए परेशानी खड़ी करती है. उन्होंने इसे बढ़ाकर 20 फीसदी करने की मांग की है, ताकि किसानों को मंडी में आने के बाद उपज बेचने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़े.

किसान नेता गुणी प्रकाश ने कहा है कि केंद्र सरकार ने 2021-22 में धान में नमी की सीमा 17 से घटाकर 16 फीसदी करने का ड्राफ्ट प्रस्ताव रखा था. किसानों ने इसका विरोध किया था. विरोध के बाद 17 फीसदी नमी की मौजूदा सीमा को ही जारी रखा गया. उनका कहना है कि हालांकि, धान खरीद  के दौरान नमी की इस सीमा को लेकर किसान संगठनों और सरकार के बीच अक्सर विवाद होता रहा है. गुणी प्रकाश ने कहा है कि खेत और मौसम की परिस्थितियों के कारण धान में नमी तय सीमा से ज्यादा हो सकती है, जिससे उन्हें खरीद केंद्रों पर परेशानी का सामना करना पड़ता है.

वहीं, किसानों का कहना है कि धान कटाई के समय बारिश या मौसम खराब होने पर धान में नमी बढ़ जाती है. ऐसे में 17 फीसदी की सीमा के कारण कई किसानों को मंडियों में धान बेचने में दिक्कत होती है. किसानों का कहना है कि नमी थोड़ी ज्यादा होने पर भी धान की सरकारी खरीद की जानी चाहिए. जबकि, कई अन्नदाताओं का कहना है कि उन्हें धान सुखाने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है या फिर मजबूरी में निजी खरीदारों को कम दाम पर फसल बेचनी पड़ रही है. ऐसे भी पंजाब, हरियाणा और तमिलनाडु जैसे राज्य भी अलग-अलग मौकों पर केंद्र से धान में नमी की सीमा  20 से 22 फीसदी तक बढ़ाने की मांग करते रहे हैं.

दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से सरकारी खरीद के लिए धान में अधिकतम 17 फीसदी नमी की सीमा तय है. यह नियम 1974-75 के खरीफ विपणन सीजन से लागू है. इसके तहत भारतीय खाद्य निगम (FCI) फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) मानकों के आधार पर धान की खरीद करता है. कृषि विशेषज्ञों और मंत्रालय के अनुसार, धान में नमी की मात्रा 17 फीसदी से ज्यादा होने पर लंबे समय तक भंडारण में दिक्कत  हो सकती है. ज्यादा नमी के कारण धान में फफूंद लगने, दाने काले पड़ने और चावल की रिकवरी कम होने का खतरा रहता है. इसी वजह से सरकारी खरीद में नमी की सीमा तय की गई है.

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