एग्रीवेट: पंजाब में धान की पराली जलाने पर रोक लगाने की कोशिशों के बीच सुपर सीडर मशीन किसानों के बीच सबसे ज्यादा पसंद की जा रही है. चालू खरीफ सीजन में किसान केंद्र की मदद से चल रही क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (CRM) योजना के तहत सब्सिडी पर मशीनें ले रहे हैं. पराली जलाने की घटनाओं को कम करने के लिए राज्य सरकार किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की मशीनों पर सब्सिडी दे रही है. इनमें सुपर सीडर की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है.
सुपर सीडर की मदद से धान की कटाई के बाद खेत में बची पराली को जलाए बिना गेहूं की बुवाई की जा सकती है. इससे पराली प्रबंधन के साथ खेत की तैयारी का काम भी आसान होता है. अब तक इस सीजन में किसानों को सब्सिडी पर 18,190 कृषि मशीनें दी गई हैं. इनमें 12,384 सुपर सीडर हैं. यानी करीब दो-तिहाई मशीनें सुपर सीडर हैं. इससे पता चलता है कि पराली प्रबंधन के लिए किसान इस मशीन को सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं.
सुपर सीडर एक साथ कई काम करता है. यह धान की पराली को काटकर मिट्टी में मिला देता है और खेत को अगली फसल के लिए तैयार करता है. इसके साथ ही इससे गेहूं और दूसरी रबी फसलों की बुवाई और खाद डालने का काम भी किया जा सकता है. कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच समय बहुत कम होता है. ऐसे में सुपर सीडर किसानों का समय बचाने में मदद करता है.
सुपर सीडर के अलग-अलग मॉडल उपलब्ध हैं. इनकी कीमत करीब 2.45 लाख रुपये से 3.25 लाख रुपये तक है. पंजाब कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कई काम करने के साथ यह मशीन पराली प्रबंधन के लिए भी काफी उपयोगी है. इससे धान की कटाई के बाद अगली फसल की खेती आसान हो जाती है. ऐसे पंजाब में इस खरीफ सीजन में धान की बंपर पैदावार होने का अनुमान है. राज्य में इस बार करीब 210 लाख टन धान उत्पादन की उम्मीद है. इसमें से लगभग 180 लाख टन धान सरकारी खरीद के लिए मंडियों में पहुंचने का अनुमान है. धान की फसल से इस बार करीब 190 लाख टन या उससे ज्यादा पराली निकलने की संभावना है. इतनी बड़ी मात्रा में फसल अवशेष का प्रबंधन पंजाब के लिए बड़ी चुनौती है.
धान की कटाई के बाद किसानों को गेहूं की बुवाई के लिए खेत तैयार करने का समय कम मिलता है. ऐसे में खेत से पराली जल्दी हटाने के लिए कई किसान इसे जला देते हैं. पंजाब और पड़ोसी हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं का असर लंबे समय से दिल्ली-NCR की हवा की गुणवत्ता पर पड़ता रहा है. खासकर अक्टूबर और नवंबर में पराली जलाने के साथ हवा की गुणवत्ता खराब होने की समस्या बढ़ जाती है.
पंजाब में खेतों में आग लगाने यानी पराली जलाने की घटनाओं में पिछले कुछ वर्षों में काफी कमी आई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में पराली जलाने के 36,636 मामले दर्ज किए गए थे. 2024 में यह संख्या घटकर 10,090 और 2025 में 5,114 रह गई. पंजाब के कृषि निदेशक गुरजीत सिंह बराड़ ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि सरकार का लक्ष्य खेतों में आग लगाने की घटनाओं को लगभग खत्म करना है. अधिकारियों के मुताबिक, अब धान की पराली को सिर्फ कृषि कचरा नहीं, बल्कि किसानों की अतिरिक्त कमाई का जरिया बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है. धान की कटाई शुरू होने के समय पराली करीब 350 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है. वहीं, सीजन खत्म होने के बाद इसकी कीमत बढ़कर करीब 600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकती है.