एग्रीवेट: सहकारिता विभाग ने किसानों को बड़ी राहत दी है. अब तमिलनाडु में सहकारी समितियों के सदस्य नहीं होने वाले किसान भी सब्सिडी वाली दरों पर बीज और खाद खरीद सकेंगे. इसके लिए राज्य की 4,400 प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियों (PACCS) में सुविधा उपलब्ध होगी. अब तक सहकारी समितियों और बैंकों से फसल लोन लेने वाले किसानों को ही इन समितियों से सस्ती दरों पर बीज और खाद मिलते थे. नई व्यवस्था के तहत किसान का PACCS का सदस्य होना या फसल लोन लेना जरूरी नहीं होगा.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, किसान PACCS के पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) काउंटर से सब्सिडी वाले बीज और खाद खरीद सकेंगे. विभाग का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य राज्य में खेती को बढ़ावा देना और ज्यादा से ज्यादा किसानों को सस्ती कृषि सामग्री उपलब्ध कराना है. हालांकि, पहले किसानों को यह साबित करने के लिए चित्ता और अडंगल दस्तावेज जमा करने पड़ते थे कि संबंधित जमीन पर खेती हो रही है. इसके बाद ही वे खाद खरीद सकते थे. किसानों को खाद अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) पर खरीदनी पड़ती थी.
सहकारिता विभाग के तहत काम करने वाली तमिलनाडु कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (TANFED) खाद की थोक आपूर्ति करती है. TANFED, प्राथमिक कृषि सहकारी ऋण समितियों (PACCS) के जरिए किसानों को खाद और दूसरी कृषि सामग्री उपलब्ध कराती है. केंद्र सरकार तमिलनाडु को सब्सिडी वाली खाद उपलब्ध कराती है. इसके बाद TANFED इस खाद को सहकारी समितियों तक पहुंचाता है, जहां से किसानों को खाद और अन्य कृषि सामग्री मिलती है.
वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के लिए 29.4 लाख टन खाद का आवंटन किया था. इसमें से 12.65 लाख टन खाद सहकारी समितियों को दी गई. इसके अलावा, सहकारी समितियों ने निजी कंपनियों से भी खाद की खरीद की थी. इससे किसानों तक खाद की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिली. वहीं, तमिलनाडु कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन (TANFED) ने वित्त वर्ष 2026-27 में 31 जुलाई तक सहकारी समितियों के जरिए 122.87 टन अच्छी गुणवत्ता वाले बीज भी उपलब्ध कराए हैं.
बता दें कि बीते मई नहीने में मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर 2026 के खरीफ सीजन के लिए यूरिया और DAP की लगातार सप्लाई सुनिश्चित करने की मांग की थी. मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा था कि तमिलनाडु की 40 फीसदी से ज्यादा आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है. राज्य में करीब 48.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में शुद्ध खेती होती है, जबकि सकल खेती का क्षेत्रफल करीब 62.25 लाख हेक्टेयर है. उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन में किसानों की जरूरत पूरी करने के लिए खाद की पर्याप्त और बिना रुकावट आपूर्ति जरूरी है.