एग्रीवेट: Dairy farming: डेयरी फार्मिंग शुरू करके अच्छी कमाई करना चाहते हैं तो केवल गाय या भैंस खरीद लेना पर्याप्त नहीं है. पशुओं की नस्ल और दूध देने की क्षमता के साथ उनके खान-पान, रहने की जगह, साफ-सफाई और स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना जरूरी है. खासकर मौसम बदलने के समय पशुओं की देखभाल में लापरवाही दूध उत्पादन और पशुओं की सेहत दोनों पर असर डाल सकती है. अक्टूबर में दिन के समय धूप तेज और सुबह-शाम मौसम ठंडा होने लगता है. ऐसे में तापमान में बदलाव से पशुओं को परेशानी हो सकती है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, डेयरी शुरू करने वाले किसानों को पशु खरीदने से पहले इन जरूरी बातों की जानकारी जरूर होनी चाहिए.
डेयरी फार्मिंग शुरू करने से पहले पशुपालन की बुनियादी जानकारी लेना बेहद जरूरी है. कई किसान दूसरे लोगों को देखकर सीधे गाय-भैंस खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में पशु के आहार, स्वास्थ्य और देखभाल को लेकर परेशानी होती है. पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम के अनुसार, पशु खरीदते समय उसकी नस्ल, उम्र, दूध देने की क्षमता और स्वास्थ्य की जानकारी जरूर लें. संभव हो तो पशुपालन का प्रशिक्षण लेकर ही डेयरी शुरू करें.
दूध देने वाले पशु, छोटे बछड़े और कमजोर पशुओं की पोषण संबंधी जरूरत अलग होती है. इसलिए सभी पशुओं को एक जैसा चारा देना सही तरीका नहीं है. पशु की उम्र, वजन, दूध उत्पादन और स्थिति के अनुसार उसका आहार तय करना चाहिए. आहार में हरा चारा, सूखा चारा और जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है. केवल भूसा या हरा चारा देने से पशु की पूरी पोषण जरूरत पूरी नहीं होती.
पशुओं के स्वास्थ्य में कृमि नियंत्रण यानी डीवर्मिंग की भी अहम भूमिका है. पेट में मौजूद परजीवी पशु को मिलने वाले पोषण का कुछ हिस्सा खत्म कर सकते हैं, जिससे पशु धीरे-धीरे कमजोर हो सकता है. बाहरी परजीवी भी पशुओं को परेशान करते हैं और कुछ मामलों में खून की कमी जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं. पशु चिकित्सक की सलाह से समय-समय पर पशुओं की जांच और जरूरत के अनुसार कृमिनाशक दवा देना चाहिए.
अक्टूबर में मौसम बदलने लगता है, लेकिन दिन में तेज धूप पड़ सकती है. ऐसे समय पशुओं को लंबे समय तक सीधी धूप में बांधकर नहीं रखना चाहिए. उनके रहने की जगह हवादार और छायादार होनी चाहिए, जहां जरूरत के अनुसार आराम मिल सके. साथ ही साफ पानी की पर्याप्त व्यवस्था रखें. मौसम में बदलाव के दौरान पशुओं के खान-पान, व्यवहार और स्वास्थ्य पर नजर रखना जरूरी है. पशु स्वस्थ रहेंगे तो दूध उत्पादन भी बेहतर बनाए रखने में मदद मिलेगी.