नागपुर संतरे पर दोहरी मार, बारिश की कमी से फसल को नुकसान.. फल का आकार भी हुआ छोटा—देखें क्या है पूरा सच – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: सूखे और कम बारिश के कारण नागपुर का विश्व प्रसिद्ध संतरा संकट में पड़ गया है. किसानों और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पानी की कमी की वजह से न सिर्फ संतरे की पैदावार घटी है, बल्कि फल का आकार भी काफी छोटा रह गया है. खास बात यह है कि सिंचाई के अभाव में नागपुर संतरे की मानक गोलाई (साइज) भी प्रभावित हुई है. आमतौर संतरे की गोलाई 70 मिलीमीटर होती है, लेकिन इस बार पानी की कमी से सिकुड़कर यह महज 60 मिलीमीटर रह गई है. ऐसे में किसानों को नुकसान का भय सता रहा है.

नागपुर में संतरे की मुख्य रूप से दो फसलें होती हैं-‘अंबिया’ और ‘मृग’. अंबिया फसल अक्टूबर के आसपास बाजार में आती है, जबकि मृग फसल फरवरी और मार्च के बीच पककर तैयार होती है. हालांकि, इस बार अक्टूबर में आने वाली अंबिया फसल को किसी तरह बचा लिया गया है, लेकिन असली चुनौती आने वाले दिनों में देखने को मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे बुरा दौर तब आएगा जब गर्मी के सीजन की फसल (मृग) तैयार होगी. फसल की कटाई  के समय तक जल संकट और गहराने की आशंका है, जिससे मृग फसल के पूरी तरह सूखने का खतरा मंडरा रहा है. फिलहाल जो मृग फल पेड़ों पर बढ़ रहे हैं, पानी की कमी की वजह से उनका विकास काफी रुक गया है. वहीं, अंबिया फसल के बगीचों से लगातार फल टूटकर गिर रहे हैं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आई है. कुछ इलाकों में किसानों को 30 फीसदी से 50 फीसदी तक का सीधा नुकसान होने का अनुमान है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पैदावार कम होने के साथ-साथ पानी न मिलने के कारण फलों की बढ़त भी रुक गई है. महाराष्ट्र राज्य कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी किसानों की इस चिंता को सही माना है. कृषि संयुक्त निदेशक उमेश घाटगे ने कहा कि सूखे के कारण किसानों के नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता. वहीं, राज्य सरकार की एजेंसी ‘महाऑरेंज’ के निदेशक मनोज जवांजाले ने चिंता जताते हुए कहा कि नागपुर संतरे की मानक गोलाई (साइज) आमतौर पर 70 मिलीमीटर होती है, लेकिन इस बार पानी की कमी से सिकुड़कर यह महज 60 मिलीमीटर रह गई है.

एपीएमसी के पूर्व निदेशक और फल व्यापारी राजेश छाबरानी के अनुसार, सीजन की शुरुआत में आमतौर पर रोजाना 150 से 200 ट्रक संतरे कलमना मंडी पहुंचते थे, लेकिन इस साल यह संख्या घटकर महज 50 ट्रक रह गई है. मंडी के जिन बड़े शेड में पहले संतरे और मौसमी के ढेर लगे रहते थे, वे अब लगभग खाली पड़े हैं. छाबरानी ने बताया कि आवक घटने की एक वजह किसानों द्वारा सीधे बगीचों से फल बेचना भी है, जिससे मंडी का व्यापार प्रभावित हुआ है. हालांकि, उन्होंने भी स्वीकार किया कि संतरे और मौसमी, दोनों का औसत आकार इस बार छोटा हो गया है.

वरुड़ के व्यापारी जावेद खान का कहना है कि अंबिया संतरा  तो जैसे-तैसे बाजार में मिल जाएगा, लेकिन असली झटका उन किसानों को लगेगा जो ‘मृग’ फसल पर निर्भर हैं. मृग फसल पूरी तरह से सिंचाई पर आधारित होती है और इस बार पानी की बेहद कमी है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

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