एग्रीवेट: हरियाणा के करनाल जिले में तेज बारिश ने धान की कटाई की तैयारी कर रहे किसानों की चिंता बढ़ा दी है. कई इलाकों में खड़ी धान की फसल जमीन पर गिर गई है. इससे किसानों को पैदावार घटने और अनाज की गुणवत्ता खराब होने का डर सता रहा है. बारिश के कारण अब कटाई में भी देरी होने की आशंका है. वहीं, करनाल के उप निदेशक कृषि (DDA) डॉ. जसविंदर सिंह ने किसानों से खेतों में जमा अतिरिक्त पानी निकालने की अपील की है. उन्होंने कहा कि अभी तक किसी किसान ने फसल नुकसान की सूचना नहीं दी है. उन्होंने कहा है कि अगर किसी किसान को बारिश से फसल का नुकसान होता है और वह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीकृत है, तो वह अपने ब्लॉक कृषि अधिकारी या DDA कार्यालय में इसकी जानकारी दे सकता है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, करनाल में सोमवार को 113.5 मिमी बारिश दर्ज की गई. यह इस सीजन में करनाल में एक दिन में हुई सबसे ज्यादा बारिश है. इसके अलावा अंबाला में 37.4 मिमी, जींद में 26.5 मिमी, कैथल में 30 मिमी, पंचकूला में 15.5 मिमी, रोहतक में 14.5 मिमी और सोनीपत में 10 मिमी बारिश हुई. यमुनानगर में 9 मिमी और कुरुक्षेत्र में 13 मिमी बारिश दर्ज की गई.
किसानों के मुताबिक, धान की फसल पककर तैयार हो चुकी है और कई किसान इसकी कटाई भी शुरू कर चुके हैं. लेकिन अचानक हुई तेज बारिश ने कटाई का काम रोक दिया है. किसानों का कहना है कि अब कटाई में करीब एक हफ्ते की देरी हो सकती है. बारिश के बाद खेतों में ज्यादा नमी होने से फसल की कटाई में भी दिक्कत आएगी. साथ ही, काटी गई धान की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका है.
किसान मलिक सिंह ने द ट्रिब्यून को बताया कि उनकी धान की फसल कटाई के लिए तैयार थी और वह दो-तीन दिन में कटाई शुरू करने वाले थे. लेकिन तेज बारिश के बाद अब उन्हें कम से कम एक हफ्ते इंतजार करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि खेत में भारी बारिश हुई है और धान की फसल जमीन पर गिर गई है. इससे उन्हें पैदावार और फसल की गुणवत्ता, दोनों को लेकर चिंता है.
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र लाठर ने कहा कि बेमौसम बारिश के कारण धान की कटाई का समय पहले के 20-25 दिनों से घटकर 15 दिन से भी कम रह सकता है. उन्होंने सरकार से धान खरीद के लिए नमी की सीमा में राहत देने की मांग की है. उन्होंने यह भी कहा कि कंबाइन हार्वेस्टर के इस्तेमाल को केवल दिन के समय तक सीमित करने वाले पुराने आदेश में भी छूट दी जानी चाहिए. किसानों को दिन-रात कंबाइन हार्वेस्टर से फसल काटने की अनुमति मिलनी चाहिए, ताकि कम समय में ज्यादा फसल की कटाई हो सके.