अल-नीनो और बारिश की अनिश्चितता के बीच भारत ने रबी के लिए 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य तय किया – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 30 सितंबर 2026, नई दिल्ली: अल-नीनो और बारिश की अनिश्चितता के बीच भारत ने रबी के लिए 177.72 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य तय किया – भारत ने वर्ष 2026-27 के रबी सीजन के लिए 177.72 मिलियन टन (MT) खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। सरकार ने यह लक्ष्य अल-नीनो की आशंका, मानसून की असमान बारिश और विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए तय किया है।

वर्ष 2026-27 के लिए देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य 373.93 MT रखा गया है, जबकि वर्ष 2025-26 में 376.56 MT खाद्यान्न उत्पादन दर्ज किया गया था। कम वार्षिक लक्ष्य के पीछे मौसम संबंधी जोखिमों और पानी की उपलब्धता के आधार पर फसल योजना में बदलाव प्रमुख कारक हैं।

खरीफ बुवाई पर अब तक मौसम के प्रभाव को सीमित बताया गया है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, असमान बारिश के बावजूद देश में कुल खरीफ बुवाई क्षेत्र में केवल 1% की कमी आई है और यह लगभग सामान्य स्तर के करीब है।

सरकार के अनुसार, पिछले तीन-चार दिनों में अच्छी बारिश के बाद देश में मानसून की कमी अब 12% रह गई है, जो पहले 14% थी। कृषि विज्ञान के मानकों के अनुसार, 19% से अधिक बारिश की कमी को गंभीर सूखे की स्थिति माना जाता है।

रबी सीजन से पहले उर्वरक उपलब्धता सरकार के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में है। राज्यों ने 2026-27 रबी सीजन के लिए डीएपी, यूरिया और एनपीके सहित कुल 38 MT उर्वरक की मांग रखी है।

देश में वर्तमान में 16.3 MT से अधिक उर्वरक का भंडार उपलब्ध है, जबकि पिछले वर्ष रबी सीजन की शुरुआत में यह स्टॉक 12.2 MT था। सरकार ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का वित्तीय बोझ किसानों पर नहीं पड़ने दिया जाएगा।

सरकार 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाएगी। यह अभियान उस पायलट परियोजना के बाद शुरू किया जा रहा है, जिसमें उर्वरक की खपत में 27% की कमी आई और देश को ₹1,400 करोड़ से अधिक की बचत हुई।

सरकार ने 177.72 MT का रबी उत्पादन लक्ष्य तय करते समय जलाशयों में पानी की स्थिति, भूजल स्तर और मिट्टी की नमी को ध्यान में रखा है।

जिन क्षेत्रों में पानी की कमी या मिट्टी में नमी कम है, वहां किसानों को अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों के बजाय दलहन, तिलहन और मोटे अनाज की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सरकार ने सूखा और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए केंद्रीय टीमों के आकलन, कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों के बीजों की उपलब्धता और फसल बीमा का दायरा बढ़ाने जैसे उपायों की भी जानकारी दी है।

खरीफ क्षेत्र में मामूली गिरावट के बीच अब रबी सीजन में उर्वरक उपलब्धता, पानी की स्थिति और फसल चयन यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि भारत 177.72 MT के उत्पादन लक्ष्य को किस हद तक हासिल कर पाता है।

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