एग्रीवेट: गन्ना मूल्य बढ़ोत्तरी की मांग पर अड़े किसानों को दिल्ली बुलाने का निमंत्रण दिया गया है. दरअसल, कर्नाटक के किसान गन्ना के मूल्य बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जिसके बाद राज्य सरकार ने मूल्य बढ़ोत्तरी की केंद केंद्र के पाले में डाल दी. किसानों को अपनी मांग पूरी होते नहीं दिखने पर राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है. इसके बाद कर्नाटक के हुब्बली में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गन्ना किसानों को दिल्ली आने का निमंत्रण दिया है. उन्होंने कहा कि सड़क पर आंदोलन करने की बजाय किसानों को दिल्ली आकर बात करनी चाहिये, केंद्र सरकार उनकी बात सुनेगी. गन्ने के उचित मूल्य की मांग पर सरकार विचार करेगी.
कर्नाटक के किसान गन्ना के एफआरपी की बढ़ोत्तरी की मांग को लेकर बीते एक सप्ताह से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं. बीते दिन किसानों ने गन्ने का लाभकारी मूल्य बढ़ाने और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के हुब्बली स्थित आवास और कार्यालय तक मार्च निकालने का ऐलान किया है. प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. केंद्रीय मंत्री जोशी के आवास और कार्यालय के पास बैरिकेड लगाए गए हैं. कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के किसानों एवं संगठनों के नेताओं के शामिल होने की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है.
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मंगलवार को हुब्बली में कर्नाटक के गन्ना किसानों से अपील करते हुए कहा वे अधिक उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) की अपनी मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन करने के बजाय चर्चा के लिए दिल्ली आएं. उन्होंने कहा कि केंद्र उनकी शिकायतें सुनने के लिए तैयार है. उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप किसी भी समय दिल्ली आकर हमसे चर्चा करें. मैं एक बार फिर अपील करता हूं कि किसी को भी सड़कों पर प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं है. अगर आप आएंगे तो हम आपसे इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे.
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री ने कहा कि इस साल फरवरी में किसान नेताओं ने उनसे मुलाकात कर गन्ने के एफआरपी में वृद्धि की मांग की थी, जिसके बाद केंद्र ने मई में गन्ना मूल्य को 355 रुपये से बढ़ाकर 365 रुपये किया है. उन्होंने कहा कि सबसे पहले फरवरी 2026 में कुछ किसान नेता संयोग से उस समय मुझसे मिले थे जब मैं एक कार्यक्रम के लिए जा रहा था. उन्होंने गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में वृद्धि का अनुरोध किया था.
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि उन्होंने उस समय प्रतिनिधिमंडल को बताया था कि मोदी सरकार हर साल एफआरपी में वृद्धि करती रही है और आगे भी ऐसा करती रहेगी. उन्होंने कहा कि कुछ किसानों को अब ऐसा लग रहा है कि उनकी मांग पर विचार नहीं किया गया क्योंकि मई में वृद्धि के बाद उनसे कोई और चर्चा नहीं हुई. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैं सभी को विनम्रतापूर्वक बताना चाहता हूं कि हर साल की तरह इस साल भी हमने यह किया है. प्रदर्शन कर रहे किसानों और अन्य वर्गों ने मांग की थी और हमने उस पर कार्रवाई की.
फरवरी 2026 में किसान नेताओं ने मुझसे मुलाकात की और गन्ने का एफआरपी मूल्य बढ़ाने का अनुरोध किया। प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी @नरेंद्रमोदी के नेतृत्व वाली सरकार हर साल एफआरपी बढ़ा रही है और मई में इसे बढ़ाकर ₹365 कर दिया गया था।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि एफआरपी का निर्धारण केवल केंद्र सरकार नहीं करती है, बल्कि इसमें मूल्य निर्धारण समिति और राज्य सरकार के सुझावों को भी शामिल किया जाता है. उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर गन्ना आयुक्त होते हैं. हम राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी लेते हैं और एफआरपी तय करते समय उसकी सिफारिशों को ध्यान में रखते हैं। यह पूरे देश में लागू प्रक्रिया है. मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के साथ आगे भी बातचीत के लिए तैयार है और किसान नेताओं तथा अधिकारियों के बीच दिल्ली में सीधी बातचीत की व्यवस्था कर सकती है.
केंद्रीय मंत्री ने संकेत दिया कि मौजूदा चक्र में गन्ने के उचित मूल्य की मांग पर सरकार विचार करेगी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने हर साल एफआरपी बढ़ाई है और इस साल भी ऐसा करेगी. किसानों की मांग है कि गन्ना किसानों का मिलों के जरिए शोषण बंद किया जाए, तुरंत गन्ना भुगतान की व्यवस्था की जाए और गन्ने का मूल्य तत्काल प्रभाव से बढ़ाने की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि जाए. बता दें कि गन्ना पेराई सीजन 1 अक्तूबर से शुरू हो रहा है.