महाराष्ट्र-कर्नाटक के सूखा प्रभावित क्षेत्रों का होगा सर्वे, 3 अक्टूबर को कर्नाटक पहुंचेगी केंद्रीय टीम – एग्रीवेट

Team Agrivate
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एग्रीवेट: 29 सितंबर 2026, नई दिल्ली: महाराष्ट्र-कर्नाटक के सूखा प्रभावित क्षेत्रों का होगा सर्वे, 3 अक्टूबर को कर्नाटक पहुंचेगी केंद्रीय टीम – महाराष्ट्र और कर्नाटक के बड़े हिस्सों में सूखे की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन करने की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार सूखे की स्थिति में राज्यों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने बताया कि कर्नाटक की स्थिति का जायजा लेने के लिए 3 अक्टूबर को केंद्रीय टीम भेजी जाएगी, जबकि महाराष्ट्र के लिए भी टीम भेजने की तैयारी की जा रही है।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि कर्नाटक में सूखे की स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्र की टीम 3 अक्टूबर को पहुंचेगी। टीम राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेगी और स्थिति का जायजा लेगी।

#देखें | दिल्ली: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान कहते हैं, “महाराष्ट्र और कर्नाटक की सरकारों ने अपने-अपने राज्यों के बड़े हिस्से में सूखे की एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि है। भारत सरकार राज्यों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी। हम कर्नाटक में एक टीम भेज रहे हैं… pic.twitter.com/cEOkTxvKYc

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से भी सूखे की स्थिति को लेकर बातचीत की है। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के बड़े हिस्से को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इसके बाद केंद्र सरकार महाराष्ट्र की स्थिति का भी आकलन करने के लिए टीम भेजने की तैयारी कर रही है। चौहान ने कहा कि वह खुद भी महाराष्ट्र और कर्नाटक का दौरा कर वहां की स्थिति को देखेंगे।

चौहान ने बताया कि शुरुआत में अल नीनो के प्रभाव के कारण खरीफ की बुआई का क्षेत्र कम होने और किसानों के सामने मुश्किलें आने की आशंका थी। हालांकि, खरीफ की बुआई के लक्ष्य लगभग पूरे हो गए। इसके बाद कई क्षेत्रों में बारिश की कमी की स्थिति सामने आई है। ऐसे में कर्नाटक और महाराष्ट्र के अलावा तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों की स्थिति की भी विस्तार से समीक्षा की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यह नहीं कहा जा रहा है कि बारिश की कमी का असर व्यापक स्तर पर है, लेकिन जहां भी इसका प्रभाव है, वहां किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो, यह सुनिश्चित किया जाएगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पानी का बजट बनाना जरूरी है। इसके तहत किसी क्षेत्र में उपलब्ध पानी और मिट्टी में मौजूद नमी का आकलन किया जाना चाहिए। इसी आधार पर यह तय किया जा सकता है कि वहां कौन-सी फसल और उसकी कौन-सी किस्म बोना उपयुक्त रहेगा।

चौहान ने बताया कि रबी अभियान 2026 को लेकर आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसमें सूखे और बारिश की कमी वाले क्षेत्रों की स्थिति के साथ रबी सीजन की तैयारियों और किसानों के सामने आने वाली संभावित समस्याओं पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

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