एग्रीवेट: 29 सितंबर 2026, भोपाल: कम लागत में अरहर की खेती से बढ़ी आमदनी, आगर मालवा के किसान ने 1 एकड़ में कमाया 1.31 लाख का मुनाफा – मध्यप्रदेश कृषि विभाग की योजना से जिले के किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने का अवसर मिल रहा है। इसी क्रम में आगर-मालवा जिले के विकासखंड आगर के ग्राम आखाखेड़ी, ग्राम पंचायत सोनचिड़ी के किसान रोहित शर्मा ने अरहर की खेती से अच्छी आमदनी हासिल की है। खरीफ वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग से अनुदान पर उन्हें अरहर की भीमा किस्म का बीज मिला था। कृषि अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से खेती करते हुए एक एकड़ में 10 क्विंटल अरहर के दानों का उत्पादन प्राप्त किया और दाल तैयार कर बेचने से 1,31,900 रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया।
रोहित शर्मा को खरीफ वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग की ओर से अनुदान पर अरहर की भीमा किस्म का बीज प्राप्त हुआ। कृषि अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने 6 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से बीज उपचार कर बुवाई की। इसके बाद फसल में समय-समय पर जैविक औषधियों और खादों का उपयोग किया। किसान की सतत देखरेख के चलते फसल कीट एवं रोग से मुक्त रही और पौधों में फलियों की संख्या भी अच्छी रही। करीब 150 से 160 दिन में फसल पककर तैयार हुई। एक एकड़ में उन्हें 10 क्विंटल दानों का उत्पादन प्राप्त हुआ।
फसल से प्राप्त दानों को सुखाने के बाद ग्रामीण क्षेत्र में प्रचलित पारंपरिक ‘धोब विधि’ से दाल तैयार की गई। दी गई जानकारी के अनुसार, आधुनिक पॉलिश वाली दाल की तुलना में इस विधि से तैयार दाल अधिक पोषक, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक बताई गई है। इस प्रक्रिया में 100 किलोग्राम अरहर के दानों से 70 किलोग्राम दाल प्राप्त हुई। तैयार दाल को आगर के जैविक हाट में 240 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा गया।
किसान के अनुसार एक एकड़ में खेती की कुल लागत 23,900 रुपये रही। इसके अलावा दानों से दाल तैयार करने में 12,200 रुपये की मूल्य संवर्धन लागत आई। इस तरह खेती और मूल्य संवर्धन की कुल लागत 36,100 रुपये रही। 10 क्विंटल अरहर के दानों से तैयार 7 क्विंटल दाल को 240 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचने पर कुल 1,68,000 रुपये की आय हुई। कुल आय में से लागत घटाने के बाद रोहित शर्मा को एक एकड़ में 1,31,900 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
किसान रोहित शर्मा ने इस सफलता के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कृषि अधिकारियों के मार्गदर्शन और उपलब्ध कराए गए बीज को खेती में उपयोगी बताया।