एग्रीवेट: 28 सितंबर 2026, विदिशा: विदिशा में 3 जगह बनेंगे CBG प्लांट, नरवाई से बनेगी बायोगैस; किसानों को मिलेगा अतिरिक्त आय का मौका – मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में फसल अवशेष यानी नरवाई के बेहतर प्रबंधन और किसानों को इसके आर्थिक उपयोग का अवसर देने की दिशा में पहल शुरू की गई है। शासन की बायोफ्यूल परियोजना के तहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा जिले के नटेरन, बासौदा और कुरवाई विकासखंडों में कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए शासकीय भूमि के चिन्हांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रत्येक विकासखंड में करीब 15 से 20 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है।
CBG प्लांट में आसपास के क्षेत्रों में किसानों के खेतों से निकलने वाले मक्का, धान, गेहूं सहित अन्य फसलों के अवशेषों का व्यवस्थित तरीके से संग्रहण कर उपयोग किया जाएगा। वर्तमान में फसल कटाई के बाद खेतों में बची नरवाई को जलाने से वायु प्रदूषण के साथ मिट्टी की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है। नरवाई जलने से मिट्टी में मौजूद लाभदायक सूक्ष्म जीव नष्ट होते हैं और भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। फसल अवशेषों को जलाने के बजाय CBG प्लांट में उपयोग करने से नरवाई प्रबंधन का किसानों को एक व्यावहारिक विकल्प मिलेगा। इससे कृषि अवशेषों को अपशिष्ट के रूप में जलाने के बजाय ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
CBG प्लांट की स्थापना से किसानों के लिए फसल अवशेषों के आर्थिक उपयोग की संभावना भी बनेगी। खेतों से नरवाई और अन्य कृषि अवशेषों के संग्रहण से लेकर प्लांट तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित होने पर किसानों को इन अवशेषों के बेहतर प्रबंधन के साथ अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकेगा। इस पहल के तहत फसल के साथ खेतों से निकलने वाले अवशेषों को भी आर्थिक गतिविधि से जोड़ने का प्रयास है। इसी अवधारणा के साथ जिले में ‘किसान बनेगा ऊर्जादाता’ की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
कलेक्टर अंशुल गुप्ता के मार्गदर्शन में नटेरन, बासौदा और कुरवाई विकासखंडों में CBG प्लांट के लिए शासकीय भूमि का प्रारंभिक स्तर पर चिन्हांकन किया जा रहा है। चिन्हित भूमि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को दीर्घ अवधि के लिए लीज पर उपलब्ध कराई जाएगी। कंपनी की ओर से यहां फसल अवशेषों के उपयोग से बायोगैस सहित अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
जिले में नरवाई जलाने की घटनाओं को देखते हुए CBG प्लांट की स्थापना को फसल अवशेष प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे खेतों में नरवाई जलाने के बजाय उसके संग्रहण और उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही वायु प्रदूषण कम करने, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और कृषि अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन में मदद मिलेगी।
किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत वरवडे ने 1 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला प्रशासन और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों से चर्चा की थी। उन्होंने जिले में CBG प्लांट की स्थापना की प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। प्लांट के संचालन के बाद किसानों के खेतों से निकलने वाले फसल अवशेषों का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में किया जाएगा। इससे नरवाई को जलाने की समस्या में कमी लाने के साथ कृषि अवशेषों के उपयोग से किसानों के लिए आय का नया अवसर विकसित करने की दिशा में काम होगा।
CBG प्लांट से एक ओर नरवाई जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा। इससे मिट्टी की गुणवत्ता के संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। नटेरन, बासौदा और कुरवाई में प्रस्तावित CBG प्लांट कृषि अवशेषों के उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक साथ जोड़ने की दिशा में काम करेंगे। प्रशासन की ओर से भूमि चिन्हांकन सहित आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है।