एग्रीवेट: 27 सितंबर 2026, नाहन (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल में अदरक की फसल पर फाइलोस्टिक्टा ब्लाइट का हमला, केवीके ने बताई दवा और मात्रा – सिरमौर जिले में अदरक की फसल पर फाइलोस्टिक्टा ब्लाइट रोग का प्रकोप देखा गया है, जिसके बाद कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सिरमौर की टीम ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर किसानों को तुरंत बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
केवीके सिरमौर के सह-निदेशक एवं प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. पंकज मित्तल के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने अदरक के प्रभावित खेतों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि लगातार बदलते मौसम और नमी की वजह से पत्तियों पर धब्बे बनने वाली इस बीमारी ने कई खेतों में तेजी से पैर पसारे हैं।
केवीके वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि फाइलोस्टिक्टा ब्लाइट से बचाव के लिए ब्लाइटॉक्स यानी कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी का इस्तेमाल करें। इसकी मात्रा तीन ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से रखने और पूरे पौधे पर अच्छी तरह छिड़काव करने की सलाह दी गई है। वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि खेत में जलभराव न होने दें और रोगग्रस्त पत्तियों को तुरंत हटाकर नष्ट कर दें, ताकि बीमारी आगे न फैले।
डॉ. मित्तल की टीम ने किसानों को यह भी समझाया कि शुरुआती लक्षण दिखते ही छिड़काव शुरू कर देना जरूरी है, क्योंकि देरी होने पर रोग पूरे खेत में तेजी से फैल सकता है और उपज पर बड़ा असर डाल सकता है। अदरक हिमाचल के कई पहाड़ी इलाकों में किसानों की एक महत्वपूर्ण नकदी फसल है, इसलिए समय रहते बचाव बेहद जरूरी माना जा रहा है।
केवीके ने किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों की नियमित निगरानी करते रहें और किसी भी असामान्य लक्षण की स्थिति में तुरंत नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से संपर्क करें। वैज्ञानिकों ने यह भी सुझाव दिया कि छिड़काव के बाद अगर बारिश हो जाए तो दोबारा छिड़काव जरूरी हो सकता है, क्योंकि पानी से दवा का असर कम हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अदरक की खेती में जल निकासी की व्यवस्था अच्छी रखना भी बीमारी से बचाव में मददगार साबित होता है, क्योंकि ज्यादा नमी फफूंद जनित रोगों को बढ़ावा देती है।
फाइलोस्टिक्टा ब्लाइट एक फफूंद जनित रोग है, जो अदरक की पत्तियों पर छोटे-छोटे भूरे धब्बों के रूप में शुरू होता है और समय पर नियंत्रण न किए जाने पर तेजी से पूरे पौधे को प्रभावित कर सकता है। लगातार बादल छाए रहने, हल्की बारिश और ज्यादा नमी वाले मौसम में इस रोग के फैलने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है, इसलिए पहाड़ी इलाकों में बदलते मौसम के इस दौर में किसानों को खासतौर पर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
सिरमौर हिमाचल प्रदेश के उन जिलों में शामिल है जहां अदरक बड़े पैमाने पर उगाई जाती है और कई किसान परिवारों की आमदनी का बड़ा हिस्सा इसी फसल पर निर्भर करता है। ऐसे में समय रहते सही सलाह मिलना और उस पर अमल करना किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है।