एग्रीवेट: उत्तर प्रदेश में अवध क्षेत्र के सुल्तानपुर, बहराइच, बाराबंकी समेत अन्य जिलों में बीते 3 दिनों से लगातार बारिश ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है. सर्वाधिक नुकसान धान, मक्का और सब्जी फसलों को हुआ है. उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी प्रभावित जिलों में सर्वे कराकर नुकसान की भरपाई के निर्देश दिए हैं. सुल्तानपुर जिले के उप कृषि निदेशक सुरेंद्र प्रताप सिंह ने मीडिया को बताया कि 10 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर खड़ी धान की फसल चौपट हुई है. उन्होंने कहा कि 1 लाख से ज्यादा किसानों ने फसल बीमा कराया है, उन्हें नुकसान की भरपाई के लिए बीमा राशि मिलेगी.
उत्तर प्रदेश के लखनऊ मौसम केंद्र ने अवध क्षेत्र में 29 सितंबर तक तेज बारिश का अनुमान जताया है. जबकि, तीन दिनों से रुक-रुककर बारिश हो रही है. इसके अलावा पूर्वांचल के कई जिलों में भी बारिश हो रही है. इससे इस इलाके में बहने वाली गोमती नदी उफान पर है. मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम में सुरक्षित रहने और जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की है. कृषि विभाग के अनुसार अगले कुछ दिन धान की फसल के लिए अहम हैं. बारिश थमने और खेतों से पानी निकलने के बाद ही फसल को हुए वास्तविक नुकसान की तस्वीर स्पष्ट होगी.
उप कृषि निदेशक सुरेंद्र प्रताप सिंह ने मीडिया को बताया कि सुल्तानपुर जिले में करीब एक माह से रुक-रुककर बारिश हो रही है. इसकी वजह से खरीफ फसलों के लिए राहत बनी हुई थी, लेकिन पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश ने धान किसानों की चिंता बढ़ा दी है. धान में दाने पड़ने लगे हैं और अगेती किस्मों की बालियां पकने लगी हैं. खेतों में पानी भरा होने के कारण तेज हवा से कई जगह फसल गिरने लगी है. तराई और निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति अधिक है.
कृषि विभाग ने किसानों से खेतों में जमा अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करने को कहा है. पकती फसल की निगरानी बढ़ाने और बारिश के दौरान उर्वरक व कीटनाशक का छिड़काव नहीं करने की सलाह दी गई है. अभी धान में किसी बड़े रोग के प्रकोप की सूचना नहीं है. मक्का और बाजरे की फसल भी बेहतर बताई गई है, लेकिन हवा चलने और ज्यादा समय तक पानी भरे रहने से फसल गिरने का खतरा बना हुआ है.
उप कृषि निदेशक ने बताया कि खरीफ सीजन 2026-27 में सुल्तानपुर जिले से 1,12,907 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत प्रीमियम जमा किया है और योजना के तहत फसलों का बीमा कराया है. उन्होंने कहा कि करीब 10,680 हेक्टेयर फसल क्षेत्र बीमा कवरेज में आ सकता है. किसानों को बीमा संबंधी दस्तावेज सुरक्षित रखने और क्षति होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समय से सूचना देने की सलाह दी गई है.