एग्रीवेट: बिहार में हालिया बाढ़ ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कई जिलों में खेत लंबे समय तक पानी में डूबे रहने से धान, मक्का, सब्जियों और केले की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है. अब तक करीब 270 करोड़ रुपये की फसलों के बर्बाद होने का अनुमान है. भागलपुर, वैशाली, कटिहार, भोजपुर, बेगूसराय, समस्तीपुर, खगड़िया और पटना में केला उत्पादक किसानों को भी बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसर, बाढ़ से भागलपुर जिले में फसल नुकसान सबसे अधिक बताया जा रहा है. जिले के 15 प्रखंडों में करीब 45 हजार हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई है. इसके बाद भोजपुर के 6 प्रखंडों में लगभग 25 हजार हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है. बेगूसराय में करीब 21 हजार और समस्तीपुर में 10 हजार एकड़ फसल बर्बाद होने की जानकारी सामने आई है. केला उत्पादक क्षेत्रों में लंबे समय तक जलभराव से पौधों के गिरने और जड़ों के सड़ने की समस्या बढ़ी है.
बिहार सरकार के प्रावधानों के अनुसार, 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति होने पर प्रभावित किसानों को इनपुट अनुदान देने का प्रावधान है. इसके तहत किसानों को फसल और नुकसान की स्थिति के आधार पर करीब 8,500 रुपये से 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर तक सहायता मिल सकती है. फिलहाल कई इलाकों में नुकसान का आकलन जारी है. खेतों से पानी पूरी तरह निकलने के बाद वास्तविक क्षति और सहायता के लिए पात्र किसानों की स्थिति स्पष्ट होगी.
बाढ़ के बाद केले के बागानों में सिर्फ पौधों के नुकसान की चिंता नहीं है, बल्कि फफूंद जनित रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है. कृषि विज्ञान केंद्र, बांका के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार दास के मुताबिक, जलभराव के बाद केले में सिगाटोका और पनामा विल्ट जैसी बीमारियां सामने आ सकती हैं. पनामा विल्ट को उकटा रोग और सिगाटोका को पत्ती का धब्बा रोग भी कहा जाता है.
डॉ.दास ने बताया, जिन खेतों से पानी निकल चुका है और केले के पौधे अभी बचे हुए हैं, वहां किसानों को जल्द जरूरी उपचार करना चाहिए. बाढ़ के बाद बंची टॉप बीमारी का खतरा भी रहता है, हालांकि फिलहाल इसकी तीव्रता कम बताई गई है. डॉ. दास ने प्रभावित पौधों में आवश्यक उपचार के लिए बाविस्टिन पाउडर या कार्बेंडाजिम के इस्तेमाल की सलाह दी है. किसानों को जलनिकासी के बाद खेत की स्थिति देखकर समय पर रोग प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी होगा.