एग्रीवेट: बिहार में पिछले 30 दिनों से बाढ़ के संकट से जूझ रहा है. अभी भी 15 जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. राज्य के 50 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और 88 प्रखंडों की 576 ग्राम पंचायतें जलमग्न हैं. राज्य सरकार ने मदद के लिए 7 हजार रुपये प्रति पीड़ित परिवार को प्रारंभिक राशि दी है. लेकिन, विपक्ष ने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए किसानों को फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए 15 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने और पीड़ित परिवारों को मदद राशि बढ़ाकर देने की मांग की गई है. राज्य के कृषि मंत्री विजय सिन्हा ने किसानों के नुकसान की भरपाई का भरोसा दिलाया है.
आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार बिहार में बाढ़ प्रभावित लोगों की संख्या 50 लाख का आंकड़ा पार कर गई है. बाढ़ पीड़ितों को राहत देने के लिए ग्रामीण विकास बैंक, सरकार के मंत्री और कई विभागों ने मुख्यमंत्री राहत कोष में अपना वेतन और लाभांश राशि जमा कराई है. विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इस पर सवाल उठाते हुए इसे नौटंकी बताया. उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि है कि प्रधानमंत्री राहत कोष जिसे कोरोना में खत्म कर पीएम केयर्स फंड बनाया गया, उस फंड से बिहार की मदद क्यों नहीं की जा रही है?
तेजस्वी यादव ने कहा कि बाढ़ के बाद भी 100 करोड़ रुपये के दीये जला बाढ़ पीड़ितों का जिया जलाने वाले सत्ताधारी संवेदनहीन लोग अब अपनी एक लाख-दो लाख की सैलरी देने की प्रतीकात्मक नौटंकी कर रहे है. इन सबकी सैलरी मिलाकर कुल 2-3 करोड़ रुपए भी जमा नहीं होंगे. क्या 50 लाख लोगों के लिए ये 2-3 करोड़ रुपए पर्याप्त रहेंगे?
तेजस्वी यादव ने कहा कि 30 दिनों से बिहार बाढ़ की विभीषिका से ही नहीं बल्कि सुखाड की भी मार झेल रहा है. बिहार में 35 फीसदी से कम बारिश हुई है. भीषण सूखे के कारण राज्य के लाखों हेक्टेयर जमीन में खड़ी फसलें नष्ट हो रही हैं. लाखों किसानों का लागत मूल्य भी नहीं निकल रहा. सूखे का सरकार ने अभी तक कोई आंकलन भी नहीं किया है. किसानों के सामने आजीविका का संकट है. दूसरी तरह बिहार विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित है. राज्य के 50 लाख लोग बाढ़ प्रभावित है, लेकिन फिर भी एनडीए की संवेदनहीन सरकार बाढ़ पीड़ितों की कोई सुध नहीं ले रही.
बिहार के किसानों की समस्याओं को सरकार सुन नहीं रही है. बाढ़ के कारण लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर में लगी धान, मक्का, सब्जी और केले की फसल बर्बाद हुई है. क्षतिग्रस्त फसल का कोई मुआवजा नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि कथित डबल इंजन सरकार बाढ़ पीड़ितों को अविलंब 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की मदद और सुखाड़ और बाढ़ प्रभावित किसानों का सर्वेक्षण करा उन्हें यथाशीघ्र मुआवजा जारी करे.